रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। राजधानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि स्नातक स्तर पर पढ़ाई कर रही 50 हजार छात्राओं को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना की शुरुआत की, जिसके तहत प्रदेश की 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाएं परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी।
- महिलाओं की सुरक्षा और स्वावलंबन सरकार की प्राथमिकता
- ‘लोकमाता’ के नाम पर बन रहे कामकाजी महिला छात्रावास
- 2017 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना
- महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य
- पुलिस बल में बढ़ेगी महिलाओं की संख्या
- उज्ज्वला, आवास और डीबीटी का किया उल्लेख
- बेटियों की शिक्षा से शादी तक योजनाओं का जिक्र
- महिलाओं को कारोबार और तकनीक से जोड़ने पर जोर
- ‘फैसले लेने वाली मेज पर भी बैठेंगी महिलाएं’
मुख्यमंत्री ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर 27 से 29 अगस्त तक महिला और उनके एक सहयात्री को भी परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं और उनकी भूमिका घरेलू कामकाज से निकलकर कारोबार और तकनीक तक पहुंच चुकी है।
महिलाओं की सुरक्षा और स्वावलंबन सरकार की प्राथमिकता
इंदिरा प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब साढ़े 12 करोड़ महिलाएं हैं। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, सुरक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सरकार ने विभिन्न योजनाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से अपील की कि रक्षाबंधन पर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और पुलिसकर्मियों को भी रक्षासूत्र बांधकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करें।
‘लोकमाता’ के नाम पर बन रहे कामकाजी महिला छात्रावास
मुख्यमंत्री ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सुशासन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और महिला स्वावलंबन की मिसाल पेश की थी।
योगी ने बताया कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और झांसी समेत कई जिलों में अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास बनाए जा रहे हैं। इनमें प्रत्येक हॉस्टल में करीब 500 कामकाजी महिलाओं के निःशुल्क रहने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
2017 से पहले की सरकारों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाएं कमजोर थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय पेंशन, छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं में बिचौलियों का प्रभाव था और योजनाओं के लाभ में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती थीं।
योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने हेल्पलाइन, महिला बीट पुलिस व्यवस्था, महिला हेल्पडेस्क, सीसीटीवी और इंटीग्रेटेड रिस्पांस सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया है।
महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में महिला कार्यबल की भागीदारी पहले करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की बेटियां नाइट शिफ्ट में भी काम कर रही हैं और शिक्षा, रोजगार, कारोबार तथा अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को सुरक्षित वातावरण के साथ आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
पुलिस बल में बढ़ेगी महिलाओं की संख्या
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जबकि अब यह संख्या लगभग 45 हजार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के तहत नई भर्तियों के बाद महिला पुलिसकर्मियों की संख्या करीब 50 हजार तक पहुंच सकती है।
उन्होंने महिला पीएसी बटालियनों, पिंक बूथ और वन स्टॉप सेंटर जैसी व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया।
उज्ज्वला, आवास और डीबीटी का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सम्मान तभी सुनिश्चित होगा, जब उन्हें घर में शौचालय, बिजली, स्वच्छ ईंधन, नल का पानी और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले।
उन्होंने उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं और गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है।
बेटियों की शिक्षा से शादी तक योजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के जरिए बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक शिक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सामूहिक विवाह योजना के तहत भी सरकार आर्थिक सहायता दे रही है।
उन्होंने बताया कि निराश्रित, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक सहायता मिल रही है। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं में सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि पहुंचाई जा रही है।
महिलाओं को कारोबार और तकनीक से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिला परिवार और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है। सरकार 8 हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल इंटरप्रेन्योर की व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, जिसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।
उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, बीसी सखी और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएं खेती, पशुपालन, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।
योगी ने कहा कि महिला समूहों को केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ब्रांडिंग, पैकेजिंग, मार्केटिंग और डिजिटल कॉमर्स से भी जोड़ा जा रहा है।
‘फैसले लेने वाली मेज पर भी बैठेंगी महिलाएं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का सशक्तीकरण तभी पूरा होगा, जब वे आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी बराबर की भागीदार बनेंगी।
उन्होंने बताया कि विभिन्न महिला उत्पादक कंपनियों, एफपीओ, ओडीओपी, एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर देने के साथ उनके उत्पादों को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाना है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना किसी तरह की चैरिटी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक भागीदारी का हिस्सा है। उन्होंने पंचायतों, स्थानीय निकायों, खेल, प्रशासन, सेना, शिक्षा और स्टार्टअप सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, अवनीश सिंह, उमेश द्विवेदी, विधायक नीरज बोरा, अमरेश कुमार और ओपी श्रीवास्तव समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।


