मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम पोषण योजना के तहत कार्यरत 3.53 लाख से अधिक मिड-डे मील रसोइयों को रक्षाबंधन के अवसर पर बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने रसोइयों के मानदेय में बढ़ोतरी के साथ उन्हें दुर्घटना बीमा, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ड्रेस के लिए बढ़ी हुई राशि देने की घोषणा की।
- मानदेय ₹2000 से बढ़कर हुआ ₹3000
- ₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा
- दुर्घटना की स्थिति में मिलेगा ₹2 लाख का सुरक्षा कवच
- बच्चों के स्वस्थ बचपन में रसोइयों की अहम भूमिका
- स्थानीय उत्पाद और मिलेट को भी मिल रही प्राथमिकता
- स्कूलों में 19 पैरामीटर पर हुआ कायाकल्प
- निपुण भारत से बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास
- श्रमिकों और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए भी योजनाएं
- रसोइयों की सेवा को मुख्यमंत्री ने सराहा
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रसोइयों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से बढ़े हुए मानदेय का चेक, परिधान किट और कैशलेस चिकित्सा कार्ड प्रदान कर रसोइयों को सम्मानित किया। इस दौरान पीएम पोषण योजना की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
मानदेय ₹2000 से बढ़कर हुआ ₹3000
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि पीएम पोषण योजना के तहत कार्यरत रसोइयों का मासिक मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये किया जाएगा। इसके अलावा ड्रेस के लिए मिलने वाली राशि को भी 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मानदेय बढ़ाना नहीं, बल्कि रसोइयों को सम्मानजनक जीवन के साथ सामाजिक और स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है।
₹5 लाख तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा
रसोइयों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करते हुए सरकार ने हर वर्ष 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी इलाज कराया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब किसी रसोइया या उसके परिवार के सदस्य के बीमार होने पर इलाज के खर्च को लेकर आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दुर्घटना की स्थिति में मिलेगा ₹2 लाख का सुरक्षा कवच
रसोइयों को दुर्घटना से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता का सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक दीपेश राज ने दुर्घटना बीमा से संबंधित एमओयू का आदान-प्रदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनधन खातों और डीबीटी व्यवस्था के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंच रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है।
बच्चों के स्वस्थ बचपन में रसोइयों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रसोइया केवल विद्यालय में भोजन तैयार करने वाली कर्मी नहीं हैं, बल्कि देश के बचपन को स्वस्थ और समर्थ बनाने के महत्वपूर्ण अभियान की सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वस्थ बचपन ही समर्थ प्रदेश और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।
उन्होंने रसोइयों से विद्यालयों की रसोई की स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भोजन की गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
स्थानीय उत्पाद और मिलेट को भी मिल रही प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम पोषण योजना के निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिलेट, मौसमी फल और अन्य स्थानीय उत्पादों को भी भोजन में प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने सुरक्षित भोजन व्यवस्था के लिए रसोई में अनावश्यक बाहरी प्रवेश पर रोक, स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
स्कूलों में 19 पैरामीटर पर हुआ कायाकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं की स्थिति काफी कमजोर थी। अब ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में 19 पैरामीटर पर सुविधाओं का विकास किया गया है।
विद्यालयों में फर्श, अलग-अलग शौचालय, पेयजल, रसोईघर, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों की तस्वीर बदलना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना है।
निपुण भारत से बच्चों में बढ़ रहा आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के ज्ञान और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय बदलाव दिखाई दे रहा है। निपुण भारत अभियान के माध्यम से बच्चों में भाषा, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के प्रति समझ विकसित की जा रही है।
गरीब परिवारों के बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पुस्तकें और स्वेटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक स्थिति किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा न बने।
श्रमिकों और विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए भी योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिकों के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए प्रदेश के 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 18 हजार बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का विस्तार सभी 825 विकासखंडों तक करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कॉलर अलाउंस, दिव्यांग बालिकाओं को स्टाइपेंड तथा ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी और हियरिंग एड जैसे सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक स्पेशल एजुकेटर भी तैनात किए गए हैं।
रसोइयों की सेवा को मुख्यमंत्री ने सराहा
मुख्यमंत्री ने कोरोना काल के दौरान जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने में रसोइयों की भूमिका को भी याद किया। उन्होंने कहा कि एक करोड़ से अधिक लोगों के लिए विभिन्न स्थानों पर भोजन की व्यवस्था में रसोइयों का योगदान रहा। महाकुंभ-2025 के दौरान प्रयागराज के आसपास बनाए गए होल्डिंग एरिया में भी बेसिक शिक्षा परिषद की रसोइयों ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि रसोइयों के मानदेय में वृद्धि के साथ उन्हें स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने भी कहा कि विभाग बच्चों की शिक्षा के साथ रसोइयों और अन्य कर्मियों के हितों के लिए लगातार काम कर रहा है।
कार्यक्रम में विधान परिषद सदस्य, विधायक, मुख्यमंत्री के सलाहकार, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


