मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की नई निर्यात नीति के शुरुआती परिणाम सामने आने लगे हैं। सरकार के मुताबिक, अप्रैल-मई 2026 के दौरान प्रदेश के निर्यात में 84.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी अवधि में देश के कुल निर्यात में 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर करीब 14 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश निर्यात के मामले में देश में पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
तीन साल की नीति से निवेशकों का बढ़ा भरोसा
उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 लागू की है। यह नीति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। सरकार का कहना है कि नीति की तीन साल की स्थिरता से उद्योगों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
नई नीति के बाद प्रदेश के अलग-अलग जिलों में निवेश की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उन्नाव और हरदोई में नई इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जबकि फर्रुखाबाद में भी नई इकाई स्थापित हुई है। मुरादाबाद की एक बंद इकाई को दोबारा शुरू किया गया है।
इसके अलावा गोरखपुर में एथेनॉल उत्पादन के लिए स्थापित इकाई ने पेय आसवनी और ब्रुअरी स्थापित करने के लिए आवेदन किया है। विभाग के अनुसार, कुछ अन्य कंपनियां भी प्रदेश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने या नई इकाइयां स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
निर्यात बढ़ने से किसानों को कैसे फायदा?
सरकार के मुताबिक, नई नीति का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों से निकलने वाले शीरे की मांग बढ़ी है, जिससे गन्ने की मांग को भी बढ़ावा मिल रहा है।
वहीं, ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद में भी वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर किसानों से होने वाली कृषि उपज की खरीद पर पड़ रहा है।
आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नितिन अग्रवाल के मुताबिक, निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश में औद्योगिक उत्पादन, किसानों से कृषि उपज की खरीद और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हो रही है।
बकाया वाली इकाइयों को नहीं मिलेगा नीति का लाभ
नई नीति में किसान हित को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। जिन आसवनियों या उनके स्वामियों की किसी अन्य इकाई अथवा चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान या आबकारी देयों की वसूली से संबंधित प्रभावी प्रमाण-पत्र है, उन्हें नीति के तहत मिलने वाली छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस प्रावधान से निर्यात प्रोत्साहन को किसानों के भुगतान से सीधे जोड़ा गया है।
कांच, पैकेजिंग और परिवहन उद्योग को भी फायदा
निर्यात और उत्पादन में बढ़ोतरी का असर इससे जुड़े दूसरे उद्योगों पर भी दिखाई दे रहा है। कांच, बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में कारोबार बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश की इकाइयों ने पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1.64 करोड़ अधिक बोतलें दूसरे राज्यों में भेजीं। यह करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है।
सरकार के मुताबिक, यह वृद्धि घरेलू आपूर्ति कम होने की वजह से नहीं, बल्कि कुल उत्पादन बढ़ने के कारण हुई है।
यूपी की नीति को राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों के लिए एक आदर्श निर्यात नीति तैयार करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें एपीडा और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग भी शामिल हैं।
टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की निर्यात नीति की सराहना की गई और इसे दूसरे राज्यों के लिए उपयोगी मॉडल के तौर पर देखा गया। राष्ट्रीय स्तर पर तैयार की जा रही मॉडल नीति में यूपी के अनुभवों को शामिल करने पर भी जोर दिया गया है।


