सावन माह में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को देखते हुए मेरठ पुलिस ने 29 जुलाई से 12 अगस्त तक विशेष ट्रैफिक डायवर्जन योजना लागू करने की घोषणा की है। इस दौरान शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात में बदलाव किया जाएगा ताकि कांवड़ यात्रियों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।
मेरठ पुलिस की इस एडवाइजरी के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश प्रवक्ता शादाब चौहान ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार होना चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक आयोजनों के दौरान प्रशासन को ऐसा रवैया अपनाना चाहिए, जिससे किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव की भावना न पैदा हो।
शादाब चौहान ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी धार्मिक गतिविधि के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो सभी मामलों में एक समान नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कांवड़ यात्रा के लिए अलग समर्पित मार्ग या कॉरिडोर विकसित करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि आम लोगों को कम असुविधा हो और यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा मार्गों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या जबरन कार्रवाई पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
वहीं, मेरठ पुलिस का कहना है कि ट्रैफिक डायवर्जन का उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शहर में यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है। प्रशासन ने लोगों से एडवाइजरी का पालन करने और यात्रा अवधि के दौरान वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है।
कांवड़ यात्रा को लेकर जारी इस ट्रैफिक व्यवस्था और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों, यातायात प्रबंधन और समान प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।


