श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान राशि से जुड़े आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने बुधवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और प्रशासक गोपाल राव से पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, जांच टीम ने दान राशि की गणना, रिकॉर्ड प्रबंधन और मंदिर प्रशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाई।
सूत्रों के मुताबिक, SIT के सदस्यों ने दान पेटियों का निरीक्षण किया, उनकी संख्या का सत्यापन किया तथा संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। टीम ने CCTV फुटेज और अन्य दस्तावेजों की भी समीक्षा की। जांच के दौरान दान राशि, उसकी सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन प्रक्रियाओं से जुड़े कई प्रश्न पूछे गए।
जांच दल के प्रमुख विजय विश्वास पंत ने उस कक्ष का भी निरीक्षण किया जहां श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषण और अन्य कीमती धातुएं सुरक्षित रखी जाती हैं। इस संबंध में जिम्मेदार कर्मचारियों से भी जानकारी ली गई।
अधिकारियों ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट, भारतीय स्टेट बैंक और संग्रह एजेंसी से जुड़े लगभग 40 कर्मचारी दान राशि की गिनती का कार्य करते हैं, जो दो पालियों में संचालित होता है।
इस मामले में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
वहीं, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चूंकि मंदिर ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था, इसलिए जांच प्रक्रिया की निगरानी भी न्यायालय को करनी चाहिए।
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट में दान राशि की कथित अनियमितताओं और वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था। सरकार के अनुसार, यह कदम तथ्यों का पता लगाने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
फिलहाल SIT विभिन्न दस्तावेजों, रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन हो सकेगा।


