कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश की राजनीति और विपक्षी एकता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब समय आ गया है जब राहुल गांधी को पूरे दिल से विपक्ष का नेतृत्वकर्ता माना जाए।
गहलोत ने कहा कि यदि देश में राजनीतिक मुकाबला स्पष्ट रूप से दो विकल्पों—नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी—के बीच दिखेगा, तो इससे वोटिंग पैटर्न में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे विपक्ष को अधिक मजबूती मिल सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी अपील की कि कांग्रेस से अलग होकर बनी कई क्षेत्रीय पार्टियों को पुनः कांग्रेस के साथ जुड़ने पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे विपक्षी एकता मजबूत होगी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई अधिक प्रभावी तरीके से लड़ी जा सकेगी।
हालांकि, गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि वे सभी स्वतंत्र क्षेत्रीय दलों पर यह दबाव नहीं बना सकते, क्योंकि कई दलों का गठन अलग परिस्थितियों में हुआ था और वे अपनी स्वतंत्र पहचान रखते हैं।
उन्होंने समाजवादी पार्टी, CPI(M) और CPI जैसे दलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका राजनीतिक इतिहास अलग रहा है, इसलिए उन पर किसी प्रकार का दावा नहीं किया जा सकता।
अशोक गहलोत ने युवाओं से भी राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए नई पीढ़ी को आगे आकर नेतृत्व संभालना चाहिए और विभिन्न विचारधाराओं को समझकर देशहित में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा यदि राजनीति से दूर रहते हैं तो भविष्य में वे अपने योगदान को लेकर प्रश्नों का सामना कर सकते हैं, इसलिए उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।


