दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में बुधवार को लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे। हादसे के दौरान स्थानीय कारोबारी रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
होटल के सामने गद्दों की दुकान चलाने वाले अरमान मंसूरी ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। जैसे-जैसे आग और धुआं ऊपरी मंजिलों तक फैला, होटल में फंसे लोग मदद के लिए पुकारने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अपनी दुकान से मोटे गद्दे निकालकर सड़क पर बिछा दिए, ताकि लोग ऊपरी मंजिलों से सुरक्षित कूद सकें।
रियाज़ुद्दीन मंसूरी के अनुसार, करीब 12 से 15 लोगों ने इन गद्दों पर कूदकर अपनी जान बचाई। कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं, लेकिन किसी की मौत नहीं हुई। बाद में उन्होंने और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में भी मदद की तथा कई घायलों को अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया।
अरमान ने बताया कि फायर ब्रिगेड के पहुंचने के बाद वे भी बचाव दल के साथ होटल के अंदर गए, लेकिन घना धुआं होने के कारण अधिक अंदर तक नहीं जा सके। उन्होंने कई बेहोश लोगों को बाहर निकालने में मदद की, जिन्हें बाद में अस्पताल भेजा गया।
इस बचाव अभियान में मंसूरी परिवार को लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये का नुकसान हुआ। उनकी दुकान के गद्दे, चादरें और अन्य सामान राहत कार्य में इस्तेमाल होने के कारण खराब हो गए। इसके बावजूद वे इस बात से संतुष्ट हैं कि उनकी वजह से कई लोगों की जान बच सकी।
रियाज़ुद्दीन मंसूरी का कहना है कि यदि होटल का दूसरा निकास द्वार बंद न होता, तो संभवतः और अधिक लोगों को बचाया जा सकता था। उनके अनुसार, फायर ब्रिगेड को बाद में उस गेट का ताला काटना पड़ा, जिसके बाद कुछ लोगों को बाहर निकाला गया।
मंसूरी परिवार का कहना है कि आर्थिक नुकसान के बावजूद लोगों की जान बचाने का संतोष उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।


