वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ़्तार करने के मामले में गिरफ़्तार 14 लोगों की ज़मानत याचिका अदालत ने ख़ारिज कर दी है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुनाया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों के ख़िलाफ़ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं और मामले की वर्तमान जांच स्थिति को देखते हुए ज़मानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
यह मामला कोतवाली थाना क्षेत्र से जुड़ा है। आरोपियों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं—298, 299, 196(1)(b), 279, 223(b), 308(5)—के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आईटी एक्ट की धारा 67 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 24 भी जोड़ी गई है।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यदि ज़मानत दी गई तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार 16 मार्च को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कुछ युवक गंगा नदी में नाव पर इफ़्तार करते दिखाई दे रहे थे। वीडियो में कथित तौर पर नॉनवेज, विशेषकर चिकन बिरयानी का सेवन करते हुए देखा गया।
इस मामले में शिकायत रजत जायसवाल, नगर अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह घटना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है।
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ़्तार किया। विजय प्रताप सिंह (एसीपी कोतवाली) ने गिरफ़्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रिया
इस मामले पर अंजुमन इंतज़ामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एस एम यासीन ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इफ़्तार एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसे इस तरह से करना उचित नहीं है।
हालांकि उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई अत्यधिक कठोर प्रतीत होती है और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
