सावन के पहले सोमवार पर शिवमय हुआ उत्तर प्रदेश, शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

shikha verma
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सावन के पहले सोमवार पर पूरा उत्तर प्रदेश शिवभक्ति के रंग में रंग गया है। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष के बीच लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए शिवालयों की ओर उमड़ पड़े हैं। रविवार देर रात से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और सोमवार तड़के से जलाभिषेक का सिलसिला आरंभ हो गया।

प्रदेश सरकार ने वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, मेरठ, बागपत, कानपुर, आगरा और संभल सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

रात से ही मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कानपुर के ऐतिहासिक श्री आनंदेश्वर मंदिर में रविवार से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस बार यहां तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। बागपत के प्राचीन श्री परशुरामेश्वर (पुरा महादेव) मंदिर में भी रविवार रात से कांवड़ियों का आगमन शुरू हो गया।

मेरठ के औघड़नाथ और सिद्धपीठ बाबा बिल्वेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सोमवार सुबह मंगला आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक आरंभ हुआ। यहां 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

विशेष श्रृंगार और परंपराओं का आकर्षण

वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ धाम को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। यहां बाबा का ‘श्री शंकर स्वरूप’ में विशेष श्रृंगार किया गया है तथा श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का पुष्प वर्षा से स्वागत किया जा रहा है।

गोरखपुर में पर्यटन विकास योजनाओं के तहत मानसरोवर, मुक्तेश्वरनाथ, मुंजेश्वरनाथ, पितेश्वरनाथ और मोटेश्वर महादेव सहित कई प्रमुख शिवालयों का सौंदर्यीकरण किया गया है।

संभल जिले के लगभग 118 वर्ष पुराने प्राचीन पातालेश्वर शिव मंदिर में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। यहां सावन भर 50 हजार से एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इस मंदिर की विशेष पहचान भगवान शिव को झाड़ू अर्पित करने की परंपरा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है।

सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क

सावन के पहले सोमवार को देखते हुए प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। वाराणसी में एंटी ड्रोन सिस्टम और जियो फेंसिंग के साथ पूरे शहर को पांच जोन और 15 सेक्टरों में विभाजित कर लगभग पांच हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग की एक लेन कांवड़ियों के लिए आरक्षित रखी गई है।

मेरठ और बागपत के कांवड़ मार्गों तथा पुरा महादेव मंदिर परिसर में पीएसी और आरएएफ सहित 500 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।

कानपुर के आनंदेश्वर मंदिर में सभी सेवादारों और कर्मचारियों के लिए पुलिस एवं जूना अखाड़ा द्वारा जारी फोटो पहचान-पत्र अनिवार्य किया गया है। वहीं जाजमऊ, नवाबगंज और पीरोड के प्रमुख शिवालयों में भी बैरिकेडिंग और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। संभल में रूट डायवर्जन लागू किया गया है तथा छह पुलिस चौकियां चौबीसों घंटे सक्रिय हैं।

महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं

प्रयागराज में बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त गंगा और यमुना का जल लेकर काशी की ओर रवाना हो रही हैं। उनकी सुरक्षा और सुविधा के लिए घाटों तथा प्रमुख मार्गों पर महिला पुलिसकर्मियों और आपदा सखियों की तैनाती की गई है, ताकि यात्रा के दौरान उन्हें हरसंभव सहायता मिल सके।

सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के इस महापर्व को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रदेश सरकार और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

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