भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के मामले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व सांसद आनंद मोहन ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एनकाउंटर की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
मीडिया से बातचीत में आनंद मोहन ने कहा कि वह न तो बुलडोजर कार्रवाई के पक्षधर हैं और न ही एनकाउंटर के। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में किसी भी पुलिस अधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि आत्मसमर्पण के बाद किसी का एनकाउंटर किया जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी व्यक्ति को क्रांतिकारी या अपराधी घोषित करने का अधिकार केवल न्यायालय के पास है। “पुलिस का काम आरोपियों को पकड़कर अदालत में पेश करना है, जहां कानून के अनुसार फैसला होता है।”
आनंद मोहन ने यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी होती है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, चाहे वह अपराधी ही क्यों न हो।
उन्होंने एनकाउंटर नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पुलिस खुद ही कार्रवाई करने लगे तो न्यायिक व्यवस्था की आवश्यकता पर प्रश्न खड़े हो जाते हैं। इस मामले को लेकर बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


