सीएम मोहन यादव के नेतृत्व में एमपी ने गेहूं उपार्जन में बनाया नया रिकॉर्ड

shikha verma
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में गेहूं उपार्जन ने इस वर्ष नया रिकॉर्ड बना दिया है। राज्य सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे पार करते हुए अब तक 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले राज्य को 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया था। लेकिन बेहतर प्रबंधन और किसानों की सक्रिय भागीदारी के चलते यह लक्ष्य भी पार हो गया।

13 लाख से अधिक किसानों से खरीदी

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, राज्य में अब तक 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीदी की गई है। इस प्रक्रिया में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है, जबकि गेहूं उपार्जन के मामले में राज्य पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है।

किसानों को 23 हजार करोड़ से अधिक भुगतान

सरकारी जानकारी के मुताबिक, किसानों को अब तक 23,708.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96.52 लाख मीट्रिक टन का परिवहन भी पूरा हो चुका है, जो कुल उपार्जन का लगभग 93 प्रतिशत है।

गेहूं की खरीद 2,585 रुपये प्रति क्विंटल MSP और राज्य सरकार द्वारा दिए गए 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस के साथ 2,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की गई है।

संभागवार गेहूं उपार्जन

  • भोपाल: 28.47 लाख मीट्रिक टन
  • उज्जैन: 22.84 लाख मीट्रिक टन
  • जबलपुर: 12.73 लाख मीट्रिक टन
  • नर्मदापुरम: 9.22 लाख मीट्रिक टन
  • इंदौर: 8.62 लाख मीट्रिक टन
  • सागर: 8.56 लाख मीट्रिक टन
  • रीवा: 6.15 लाख मीट्रिक टन
  • ग्वालियर: 4.36 लाख मीट्रिक टन
  • चंबल: 2.40 लाख मीट्रिक टन
  • शहडोल: 0.70 लाख मीट्रिक टन

व्यवस्थाओं में भी सुधार

सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाओं को मजबूत करते हुए तौल कांटों की संख्या बढ़ाई, किसानों की सुविधा के लिए समय सीमा बढ़ाई और भुगतान प्रक्रिया को तेज किया। कई केंद्रों पर देर रात तक तौल और बिलिंग की व्यवस्था की गई ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं कई उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की।

रिकॉर्ड स्तर पर उपार्जन

इस वर्ष कोविड काल को छोड़कर पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक गेहूं उपार्जन दर्ज किया गया है। सरकार का दावा है कि यह उपलब्धि किसानों की मेहनत और बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन का परिणाम है।

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