मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक व्यक्ति की गलती की कीमत कई बार पूरे संस्थान को चुकानी पड़ती है। इसी तरह उत्तर प्रदेश ने भी लंबे समय तक एक व्यक्ति और एक परिवार की राजनीति की कीमत पहचान के संकट, खराब कानून-व्यवस्था, अराजकता और भ्रष्टाचार के रूप में चुकाई है। उन्होंने कहा कि आज पारदर्शिता और सुशासन के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के सामने पहचान का कोई संकट नहीं है और प्रदेश के लोग देश-दुनिया में गर्व से खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बता सकते हैं।
- साढ़े नौ साल में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी
- अंग प्रत्यारोपण से लेकर एआई आधारित डायग्नोस्टिक तक सुविधाएं
- ‘अब चुनौती इलाज के लिए पैसे की नहीं, वेटिंग लिस्ट कम करने की’
- 20 बेड से 1,400 बेड का संस्थान
- यूपी में मेडिकल कॉलेज और मेडिकल सीटों में बड़ा इजाफा
- चिकित्सा क्षेत्र में शोध और नवाचार पर जोर
- ‘लोहिया संस्थान से आ सकता है चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल’
- 194 पदों पर भर्ती, नवनियुक्त कर्मचारियों को मिले नियुक्ति पत्र
- दो पुस्तकों और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन
मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान में अंग प्रत्यारोपण यूनिट समेत कई अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लोकार्पण किया और संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का विमोचन भी किया।
साढ़े नौ साल में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और शुचिता बेहद महत्वपूर्ण है। चयन में भेदभाव या अनियमितता का असर पूरे संस्थान और व्यवस्था पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में करीब 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कह सकता कि भर्ती में उसके साथ भेदभाव हुआ या किसी प्रकार का लेनदेन किया गया।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें से लगभग 9.5 लाख की नियुक्ति वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई है। उन्होंने कहा कि यह युवा कार्यबल प्रदेश के विकास को गति दे रहा है।
अंग प्रत्यारोपण से लेकर एआई आधारित डायग्नोस्टिक तक सुविधाएं
मुख्यमंत्री ने संस्थान में तैयार मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट, 40 बेड के इमरजेंसी वार्ड, मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 मरीजों की क्षमता वाले वेटिंग हॉल समेत कई सुविधाओं का लोकार्पण किया।
इसके अलावा रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 4डी-सीटी सिम्युलेटर, पेट-सीटी, स्पेक्ट-सीटी, 1.5 टेस्ला एमआरआई और पीएमआर विभाग में नेविगेटेड आरटीएमएस मशीन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी शुरू की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण यूनिट शुरू होने से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची को कम करने में मदद मिलेगी। संस्थान में जल्द ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इसके साथ ही रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, एआई आधारित डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में भी संस्थान आगे बढ़ रहा है।
‘अब चुनौती इलाज के लिए पैसे की नहीं, वेटिंग लिस्ट कम करने की’
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों में 10-10 बेड पर निशुल्क डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना और मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों के उपचार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि आज इलाज के लिए धन की उपलब्धता बड़ी समस्या नहीं रह गई है। अब चुनौती गंभीर बीमारियों, विशेषकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सेवाओं में प्रतीक्षा सूची को कम करने की है।
20 बेड से 1,400 बेड का संस्थान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में यह सवाल था कि यहां अस्पताल रहेगा या इसे संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार ने इसे संस्थान का स्वरूप देने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि कभी 20 बेड से शुरू हुआ यह परिसर आज करीब 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान में बदल चुका है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में 1,010 बेड के नए अस्पताल और 350 बेड के ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की तैयारी भी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी संस्थान की सफलता का वास्तविक पैमाना जनता की संतुष्टि है।
यूपी में मेडिकल कॉलेज और मेडिकल सीटों में बड़ा इजाफा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर 41 मेडिकल कॉलेज थे। आज इनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई है। प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हैं।
उन्होंने बताया कि एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक, जबकि पीजी सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो गई हैं। नर्सिंग के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। पहले प्रदेश में केवल दो नर्सिंग कॉलेज थे, जबकि अब 26 संचालित हैं और 33 निर्माणाधीन हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की संख्या भी 1,227 से बढ़कर 3,438 हो गई है।
चिकित्सा क्षेत्र में शोध और नवाचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा संस्थानों से उपचार के साथ शोध, नवाचार और तकनीक को जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े आंकड़ों पर विदेशों में शोध हो रहे हैं, जबकि हमें अपने मेडिकल डेटा को संरक्षित कर उसका उपयोग स्वयं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित करने के लिए मेडिकल डेटा का वैज्ञानिक इस्तेमाल जरूरी है। आईआईटी कानपुर के साथ मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एसजीपीजीआई में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क जैसी पहल इसी दिशा में की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीमारी का स्वरूप लगातार बदल रहा है, इसलिए चिकित्सा संस्थानों को भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आगे की तैयारी करनी होगी। हीलिंग, लर्निंग और डिस्कवरी साथ-साथ चलेंगी, तभी कोई संस्थान वास्तविक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बन सकेगा।
‘लोहिया संस्थान से आ सकता है चिकित्सा क्षेत्र का नोबेल’
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि छह वर्षों में लोहिया संस्थान ने तेजी से प्रगति की है। यहां हो रहे शोध और कार्यों को देखते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस संस्थान से चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता भी निकल सकता है।
उन्होंने चिकित्सकों और विद्यार्थियों से मरीजों की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों का संकल्प होना चाहिए कि कोई मरीज निराश होकर वापस न लौटे।
चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि 20 बेड से शुरू हुआ संस्थान आज 1,400 बेड तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से बदलाव आया है।
194 पदों पर भर्ती, नवनियुक्त कर्मचारियों को मिले नियुक्ति पत्र
प्रदेश सरकार के सहयोग से संस्थान में 194 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है। मुख्यमंत्री योगी ने नवनियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें टेक्निकल ऑफिसर परफ्यूजन अनुज कुमार शुक्ला, डाइटीशियन ममता तिवारी और सावन कुमार समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों, संकाय सदस्यों और नर्सिंग कर्मियों को भी सम्मानित किया। सीएमएस एवं जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह को डायरेक्टर एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किया गया। वहीं डॉ. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार वर्मा समेत अन्य संकाय सदस्यों को डायरेक्टर्स अवार्ड ऑफ मेरिट दिया गया।
नर्सिंग क्षेत्र में उमा पांडेय को डायरेक्ट में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष का पौधार्स मेरिट अवार्ड और मुख्य नर्सिंग अधिकारी सुमन सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
दो पुस्तकों और वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट के साथ डॉ. अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सही जानकारी सही देखभाल’ और डॉ. एसएस नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर फाल्स’ का विमोचन किया।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष, संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने मुख्यमंत्री को रुद्राक्ष का पौधा भेंटकर स्वागत किया।


