बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागरिकों से सख्त अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और सिविक सेंस अपनाएं। जस्टिस जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने बुधवार को आदेश में कहा कि देश के नागरिकों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेना चाहिए।
बड़ों का कर्तव्य
कोर्ट ने कहा कि बड़ों और माता-पिता का नैतिक कर्तव्य है कि वे नियमों का पालन करें, ताकि बच्चे उनसे सही आदतें सीखें। जस्टिस जैन ने टिप्पणी की, “जब भारतीय विदेश में जाते हैं, तो वहां के नियमों का पालन करते हैं। तो फिर भारत लौटने पर अपने ही देश के नियमों का पालन क्यों नहीं करते?”
ट्रैफिक पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अक्सर लोग सिग्नल तोड़कर सड़क पार करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। खासकर टू-व्हीलर चालकों को नियमों का पालन करने की जरूरत है। अदालत ने ट्रैफिक पुलिस को सख्त कार्रवाई करने की सलाह दी।
हादसे की पृष्ठभूमि
यह टिप्पणी एक मामले में आई है, जिसमें ठाणे म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट की बस ने एक व्यक्ति को टक्कर मार दी थी। पीड़ित पार्किंसन से पीड़ित और आंशिक रूप से लकवाग्रस्त था। नवंबर 2012 में सड़क पार करते समय बस की चपेट में आया और मार्च 2013 में उसकी मौत हो गई।
मुआवजे की रकम बढ़ाई
मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने 2016 में परिवार को 13 लाख रुपये का मुआवजा दिया था। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्य देखते हुए मुआवजा बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया। अदालत ने कहा कि मृतक को किसी की मदद से सड़क पार करनी चाहिए थी, लेकिन बस चालक को भी सावधानी बरतनी चाहिए थी।

