मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सेवा परीक्षा (SSE)-2025 की मुख्य परीक्षा आयोजित करने पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। इस फैसले के बाद अब मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) मुख्य परीक्षा का आयोजन कर सकेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने दिया। कोर्ट ने पहले 2 अप्रैल 2025 को निर्देश दिया था कि बिना अनुमति के मुख्य परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकती। अब अंतरिम रोक हटाए जाने के साथ यह प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया है।
हजारों अभ्यर्थियों को राहत
इस फैसले से लगभग 4,000 अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो राज्य स्तरीय पदों जैसे उप जिलाधिकारी, उप पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार के लिए तैयारी कर रहे थे। प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवार अब मुख्य परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले का अंतिम निपटारा निकट भविष्य में संभव नहीं है, इसलिए मुख्य परीक्षा पर लगी रोक हटाई जानी चाहिए। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी।
विवादित मुद्दे क्या हैं?
याचिकाओं में कई संवैधानिक और प्रक्रिया संबंधी मुद्दे उठाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं—
- प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में श्रेणीवार कट-ऑफ अंक सार्वजनिक न करना
- आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों का अनारक्षित पदों पर चयन न होना
- आयु सीमा में छूट का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों का अनारक्षित श्रेणी में स्थानांतरण न होना
सुनवाई के दौरान MPPSC ने श्रेणीवार कट-ऑफ अंक सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपे, हालांकि याचिकाओं में उठाए गए अन्य सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
अगली सुनवाई 17 जुलाई को
कोर्ट ने कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें याचिकाओं पर आगे विचार किया जाएगा।


