केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर किया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
प्रल्हाद जोशी वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ-साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच आया फैसला
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब नीट परीक्षा विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने से प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद यह घटनाक्रम सामने आया। संगठन की ओर से कहा गया कि उनकी मांगें स्वीकार कर ली गई हैं और प्रदर्शनकारियों से वापस लौटने की अपील की गई है।
धर्मेंद्र प्रधान ने बताई इस्तीफे की वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए कहा कि देश में बने हालात का गलत फायदा राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा सकें और छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को सौंपा है।
उन्होंने कहा कि वह चार दशक से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार के लिए काम करते रहे हैं। उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी चिंताओं का सम्मान करने की बात कही।
NEET विवाद का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस मामले में जिम्मेदारी ली और किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो, इसके लिए प्रयास किए।
प्रदर्शनकारियों ने बताया अपनी मांगों की जीत
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों की आवाज की ताकत को दिखाता है।
वहीं, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की थी।
विपक्ष ने भी उठाया था मुद्दा
NEET पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार सरकार पर निशाना साध रहे थे। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद के अंदर और बाहर प्रदर्शन किए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी।
अब आगे की जिम्मेदारी प्रल्हाद जोशी के पास
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रल्हाद जोशी संभालेंगे। उनके सामने परीक्षा सुधार, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को मजबूत करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।


