समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी-अठन्नी’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन किसी नेता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह टिप्पणी केवल जयंत चौधरी तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों और जाट समाज की भावनाओं से भी जुड़ी है।
‘सपा को समझ नहीं आ रहा सत्ता में वापसी कैसे हो’
ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक रूप से दिग्भ्रमित नजर आ रही है और उसे यह समझ नहीं आ रहा कि सत्ता में वापसी का रास्ता क्या है।
उन्होंने कहा कि सपा को अपने काम और शासन के रिकॉर्ड के आधार पर जनता के बीच जाना चाहिए। पाठक ने सवाल उठाया कि अगर पार्टी अपने नाम और पिछले शासन के आधार पर वोट मांगने से बच रही है, तो इसके पीछे की वजह क्या है।
सपा सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला
उपमुख्यमंत्री ने सपा के पूर्व शासनकाल को लेकर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान प्रदेश में अपराध, दंगे और अराजकता की स्थिति रही और उत्तर प्रदेश की छवि प्रभावित हुई।
पाठक ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे, सड़क, बिजली और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में काम हुआ है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की अर्थव्यवस्था और राजस्व की स्थिति में भी सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में एयरपोर्ट, सड़क और रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ निवेश के अवसर भी बढ़े हैं। पाठक ने दावा किया कि योगी सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था और विकास को मजबूत करना है।
‘अपने नाम पर वोट मांगने से क्यों बचती है सपा?’
ब्रजेश पाठक ने सपा की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को जनता के बीच अपने काम का हिसाब लेकर जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपने शासनकाल की उपलब्धियों के बजाय दूसरे राजनीतिक दलों और नेताओं पर हमला करने में अधिक रुचि दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा आज रोजगार, निवेश और विकास के अवसरों की ओर देख रहा है और प्रदेश में इन क्षेत्रों में लगातार काम किया जा रहा है।
‘चवन्नी-अठन्नी’ बयान पर अखिलेश को घेरा
अखिलेश यादव के जयंत चौधरी को लेकर दिए गए ‘चवन्नी-अठन्नी’ वाले बयान पर ब्रजेश पाठक ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भाषा की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह और अजीत सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने किसानों के लिए लंबे समय तक काम किया। ऐसे में जयंत चौधरी के लिए इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।
पाठक ने आरोप लगाया कि इस बयान से केवल जयंत चौधरी नहीं, बल्कि किसान और जाट समाज भी आहत हुआ है। हालांकि, यह ब्रजेश पाठक की राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
उपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए ‘वंदे मातरम’ को लेकर पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक कारणों से समय-समय पर राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अपना रुख बदला।
पाठक ने स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत और देशभक्ति से जुड़े प्रतीकों का सम्मान किया जाना चाहिए।
लोहिया के बयान का हवाला देकर परिवारवाद पर हमला
ब्रजेश पाठक ने समाजवादी चिंतक राम मनोहर लोहिया के कथित विचार का हवाला देते हुए अखिलेश यादव की राजनीति पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि लोहिया परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ थे, जबकि उनके नाम पर राजनीति करने वाली सपा आज परिवारवाद के आरोपों से घिरी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हुए बदलाव विपक्ष के लिए चुनौती बन गए हैं। पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव को सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठाने के बजाय जनता के सामने अपनी पार्टी का विजन और पिछला रिकॉर्ड रखना चाहिए।
अखिलेश यादव के ‘चवन्नी-अठन्नी’ बयान पर सत्ता पक्ष के नेताओं के हमले लगातार तेज हो रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर सपा और भाजपा के बीच आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और बढ़ने के आसार हैं।


