डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरज़ाना की हत्या के मामले में निचली अदालत से दोषी ठहराए गए रेयान को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए रेयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया और रिहा करने का आदेश दिया। यह मामला साल 2016 का है और दोषी ठहराए जाने के लगभग 10 साल बाद अब रेयान की रिहाई होगी।
जानकारी के अनुसार, 2 अप्रैल 2016 को बिजनौर के सहसपुर निवासी NIA के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरज़ाना बिजनौर के स्योहारा क्षेत्र में शादी में शामिल होने जा रहे थे। उसी दौरान बाइक पर सवार दो हमलावरों, रेयान और मुनीर ने उनकी कार को ओवरटेक किया और उन पर कई गोलियां चलाईं। तंजील मौके पर ही मौत हो गए, जबकि फरज़ाना घायल हुईं और 10 दिन बाद उनकी भी मृत्यु हो गई।
ट्रायल कोर्ट में कुल 19 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जिनमें तंजील के भाई रागिब मसूद, चश्मदीद हसीब और दिवंगत अधिकारी की बेटी शामिल थीं। 2022 में सेशंस कोर्ट ने रेयान और मुनीर को हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। वहीं, अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपों को “संशय से परे” साबित करने में विफलता दिखाई। अदालत ने यह मानते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और रेयान को सभी आरोपों से बरी कर रिहा करने का आदेश दिया।

