BRICS Summit 2026 : PM मोदी और पुतिन की अहम मुलाकात, डिफेंस और एनर्जी सहयोग पर अहम फैसले

Nikhil Malhotra
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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली के पालम एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे। यहां विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। यूक्रेन स…

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के दिल्ली के पालम एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे। यहां विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया। यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद यह पुतिन की भारत की दूसरी यात्रा है। रूस-यूक्रेन संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। ऐसे समय में पुतिन की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक को दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक करेंगे। ऐसे समय में भारत के लिए यह मुलाकात अहम है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे चर्चा में हैं

भारत ने इस साल BRICS की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी है। दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ आर्थिक विकास और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है

नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर पड़ रहा है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिका की ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं टैरिफ नीतियां प्रमुख हैं

सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग समेत कई प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं

भारत की मेजबानी में हो रहा यह सम्मेलन सिर्फ सदस्य देशों के आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, टैरिफ, क्षेत्रीय संघर्ष, विकास और रणनीतिक सहयोग जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं

स्रोत: readnownews.in

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