अखिल भारतीय संत समिति की बैठक के बाद काशी में आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने कथित रूप से सनातन धर्म और साधु-संत समाज के खिलाफ की जा रही गतिविधियों का विरोध करने की बात कही। समिति ने इसी उद्देश्य से ‘सनातन शंखनाद’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
संत समाज ने की कानूनी और वैचारिक लड़ाई की घोषणा
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज अब सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर वैचारिक और कानूनी स्तर पर अपनी आवाज उठाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से संत समाज कई विषयों पर शांत रहा, लेकिन अब धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से देशभर में सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
प्रदर्शन को लेकर जताई नाराजगी
पत्रकार वार्ता में जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर के बाहर हुए प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो संत समाज कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीति में धार्मिक प्रतीकों और साधु-संतों को लेकर टिप्पणियां लगातार विवाद का विषय बन रही हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज ऐसे मामलों में लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखेगा।
कई धार्मिक संगठनों का समर्थन
‘सनातन शंखनाद’ अभियान को श्री काशी विद्वत् परिषद और विश्व हिंदू परिषद की ओर से समर्थन मिलने की बात कही गई है। परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के प्रतिनिधि शामिल रहे।
नवंबर में होगी ‘संस्कृति संसद’
बैठक में आगामी 2 से 5 नवंबर तक वाराणसी में ‘संस्कृति संसद’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया। आयोजकों के अनुसार, इसमें देशभर से 3,000 से अधिक संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम की शुरुआत राम मंदिर आंदोलन में बलिदान हुए कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ किए जाने की योजना है। संत समिति ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन मूल्यों पर चर्चा करना होगा।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े एक राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। वाराणसी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, बिहार के पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और अयोध्या से समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद संत समाज ने देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
अखिल भारतीय संत समिति की बैठक के बाद काशी में आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने कथित रूप से सनातन धर्म और साधु-संत समाज के खिलाफ की जा रही गतिविधियों का विरोध करने की बात कही। समिति ने इसी उद्देश्य से ‘सनातन शंखनाद’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है।
संत समाज ने की कानूनी और वैचारिक लड़ाई की घोषणा
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज अब सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों पर वैचारिक और कानूनी स्तर पर अपनी आवाज उठाएगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से संत समाज कई विषयों पर शांत रहा, लेकिन अब धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि अभियान के माध्यम से देशभर में सनातन संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
प्रदर्शन को लेकर जताई नाराजगी
पत्रकार वार्ता में जगद्गुरु बालक दास ने संसद परिसर के बाहर हुए प्रदर्शन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो संत समाज कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि राजनीति में धार्मिक प्रतीकों और साधु-संतों को लेकर टिप्पणियां लगातार विवाद का विषय बन रही हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज ऐसे मामलों में लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से अपना पक्ष रखेगा।
कई धार्मिक संगठनों का समर्थन
‘सनातन शंखनाद’ अभियान को श्री काशी विद्वत् परिषद और विश्व हिंदू परिषद की ओर से समर्थन मिलने की बात कही गई है। परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री अशोक तिवारी ने अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के प्रतिनिधि शामिल रहे।
नवंबर में होगी ‘संस्कृति संसद’
बैठक में आगामी 2 से 5 नवंबर तक वाराणसी में ‘संस्कृति संसद’ आयोजित करने का निर्णय लिया गया। आयोजकों के अनुसार, इसमें देशभर से 3,000 से अधिक संतों और धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
कार्यक्रम की शुरुआत राम मंदिर आंदोलन में बलिदान हुए कारसेवकों की स्मृति में रुद्राभिषेक के साथ किए जाने की योजना है। संत समिति ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सनातन मूल्यों पर चर्चा करना होगा।


