पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर पूरा देश उस दर्दनाक घटना को याद कर रहा है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इसी हमले में कानपुर के 31 वर्षीय शुभम द्विवेदी भी मारे गए थे।
शुभम की पत्नी ऐशान्या द्विवेदी आज भी उस भयावह घटना को भूल नहीं पाई हैं और अपने पति समेत सभी शहीदों की याद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।
शादी के दो महीने बाद ही उजड़ गया जीवन
ऐशान्या ने बताया कि उनकी शादी को केवल दो महीने ही हुए थे जब यह दर्दनाक हादसा हुआ। उन्होंने कहा—
“मेरा पूरा जीवन एक पल में बदल गया। आज भी यकीन नहीं होता कि वो खुशियां इतनी जल्दी खत्म हो जाएंगी।”
वे अब खुद को सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखने की कोशिश कर रही हैं ताकि शुभम की यादें हमेशा जिंदा रहें।
खौफनाक मंजर आज भी ताज़ा
ऐशान्या ने उस दिन को याद करते हुए कहा कि आतंकियों ने धार्मिक पहचान पूछकर शुभम को गोली मार दी थी। यह घटना उनके लिए आज भी एक गहरा सदमा बनी हुई है।
उन्होंने कहा—
“साल भर बीत जाने के बाद भी वो खौफनाक मंजर मेरी आंखों के सामने रहता है।”
शहीद का दर्जा देने की मांग
ऐशान्या ने मांग की है कि इस हमले में मारे गए सभी 26 लोगों को शहीद का दर्जा दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह हमला धार्मिक आधार पर किया गया नरसंहार था।
परिवार शुभम के नाम पर एक ट्रस्ट बनाने की भी योजना बना रहा है, ताकि आतंकवाद पीड़ितों की मदद की जा सके।
आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष
ऐशान्या ने कहा कि भारतीय सेना लगातार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और ऐसे अभियानों का वे समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा कि आतंक के खिलाफ यह लड़ाई जारी रहनी चाहिए।
यादों में जिंदा रहेगा प्यार
ऐशान्या का कहना है कि दर्द शायद कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन शुभम की यादें और उनका बलिदान हमेशा जिंदा रहेगा।
22 अप्रैल को कानपुर में होने वाला श्रद्धांजलि कार्यक्रम न केवल याद करने का अवसर होगा, बल्कि न्याय और सम्मान का प्रतीक भी बनेगा।

