एआई से बदलेंगे बिहार के गांव, खेती से पंचायत तक कैसे आ रहा डिजिटल बदलाव

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*एआई के जरिये भारत के गांवों का होगा विकास, जानिए पूरी कहानी

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  • ग्रामीण इलाकों में बैठक,कृषि, भाषा, शिक्षा समेत सभी क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल बढ़ने से लिया गया फैसला
  • दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर
  • ग्रामीण इलाकों में कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल सेवाएं हो रही आसान

पटना, 24 फरवरी।
भारत में ग्रामीण विकास और शासन को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से उपयोग हो रहा है। सरकार की #AIforAll रणनीति और हालिया दिशा-निर्देशों के तहत एआई को समावेशी विकास का प्रमुख माध्यम बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण भारत में। नीति आयोग द्वारा जून 2018 में जारी राष्ट्रीय रणनीति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) को परिवर्तनकारी टूल के रूप में पहचाना गया। बिहार भी एआई के क्षेत्र में अपने कदम मजबूत कर रहा है। हाल के दिनों में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में राज्य की ओर से कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। यह रणनीति कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में एआई के माध्यम से दूरदराज की आबादी तक सेवाएं पहुंचाने पर जोर देगी। ग्रामीण ई-गवर्नेंस में एआई के व्यावहारिक जीवन में इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार कई नए प्लेटफॉर्म और मिशन लॉन्च कर रही है, जो ग्रामीण इलाकों में पारदर्शिता, रोजगार, कृषि, शिक्षा और भाषाई समावेशन को मजबूत कर रहे हैं। सभासार एक प्रमुख एआई टूल है, जिसे पंचायती राज मंत्रालय ने अगस्त 2025 में लॉन्च किया। यह ग्राम सभा और पंचायत बैठकों के ऑडियो/वीडियो से स्वचालित रूप से संरचित मिनट्स तैयार करता है। भाषिनी के साथ एकीकृत होने से यह 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजीकरण आसान, सटीक और बहुभाषी हो गया है। इससे मैन्युअल प्रयास कम होता है और अधिकारी पंचायतों के 9 सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
-ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म पंचायतों के बजट, लेखांकन, निगरानी और भुगतान को डिजिटल रूप से एकीकृत करता है। 2025-26 में यह 2 लाख 50 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों तक फैल चुका है। इसी तरह ग्राम मानचित्र जीआईएस-आधारित टूल से परिसंपत्तियों का मानचित्रण, परियोजना निगरानी और ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) में स्थानिक डेटा का उपयोग संभव हो रहा है। इससे साक्ष्य-आधारित योजना और आपदा प्रबंधन मजबूत बना है।
-एआई कोष: एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है जो सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों से डेटासेट और रेडी टू डिप्लॉय एआई मॉडल उपलब्ध कराता है। फरवरी 2026 तक ये 20 उद्योगों में फैले 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 मॉडल के साथ काम करता है। ये ग्रामीण ई-गवर्नेंस और लोक प्रशासन के लिए समाधानों का विकास करता है। फरवरी 2026 तक प्लेटफॉर्म पर 69 लाख से अधिक विजिट और 5 हजार मॉडल डाउनलोड दर्ज हो चुके हैं।
-भूप्रहरी: यह एआई और भू-स्थानिक (जीआईएस) तकनीक से मनरेगा के तहत बनी परिसंपत्तियों की रीयल-टाइम निगरानी करता है। इसे विकसित भारत-गारंटी (वीबी-जी) के तहत बनी सभी परिसंपत्तियों की ट्रैकिंग के लिए बढ़ाया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।

कृषि क्षेत्र में एआई का कमाल
कृषि मंत्रालय ने किसानों के लिए कई एआई टूल लॉन्च किए हैं। इनमें किसान ई-मित्र एक वर्चुअल असिस्टेंट है, जो सरकारी योजनाओं, आय सहायता आदि की जानकारी देता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म उपग्रह इमेज, मौसम और मिट्टी के डेटा से रीयल-टाइम सलाह देते हैं। इससे कीटों का पता लगाना, सिंचाई-बुवाई का सही समय तय करना और फसल उत्पादन बढ़ाना आसान हो गया है।

शिक्षा और कौशल में एआई
एनसीईआरटी के दीक्षा प्लेटफॉर्म में एआई से वीडियो सर्च और रीड-अलाउड टूल जैसी सुविधाएं हैं, जो दिव्यांग छात्रों के लिए बहुत उपयोगी हैं। यूथ फॉर उन्नति और विकास को एआई (युवा) प्रोग्राम कक्षा 8 से 12 के छात्रों को एआई और डिजिटल कौशल सिखाता है, ताकि वे भविष्य के लिए तैयार हों।

भाषा समावेशन में एआई की बड़ी भूमिका
भाषिनी 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट और वॉयस इंटरफेस देता है। यह 23 से ज्यादा सरकारी सेवाओं से जुड़ा है| इससे ग्रामीण इलाकों में कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल सेवाएं आसान हो रहीं हैं। अक्टूबर 2025 तक 350 से अदिक एआई मॉडल की सहायता की और 10 लाख डाउनलोड हो चुके हैं। यह प्लेटफार्म सुनिश्चित करता है कि भाषाई विविधता कल्याणकारी योजनाओं, सूचना या सार्वजानिक सेवाओं तक पहुंच में बाधा न डाले।

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