छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को राम अवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दोषी करार दिया है। इस फैसले से उन्हें बड़ा झटका लगा है। यह मामला वर्ष 2003 का है, जब रायपुर में व्यवसायी-राजनेता राम अवतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी।
तीन हफ्तों में सरेंडर का आदेश
हाई कोर्ट ने 2 मार्च 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस केस में साल 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी।
हालांकि, अपील को पहले देरी के आधार पर खारिज कर दिया गया था। बाद में सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां से देरी माफ करते हुए मामला दोबारा हाई कोर्ट को भेजा गया। इसके बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई कर जोगी को दोषी ठहराया।
अमित जोगी की प्रतिक्रिया
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उनकी बात सुने उन्हें दोषी ठहराया गया, जो ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उनकी दलीलें सुनने के बाद उन्हें बरी किया था, लेकिन हाई कोर्ट में सुनवाई बहुत कम समय में पूरी कर ली गई। उनके अनुसार, मामला करीब 12,000 पन्नों का है और इतनी कम अवधि में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखना मुश्किल था।
जोगी ने यह भी कहा कि उनका मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उन्हें वहां निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद है।

