राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव लगातार नए-नए नैरेटिव गढ़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। बृजलाल ने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता में आने के बाद ‘बंधुराष्ट्र’ बनाने की बात करते हैं, लेकिन ऐसे राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे पहले ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना जरूरी है। पार्टी और निजी हितों से ऊपर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बृजलाल ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की राजनीति लंबे समय से तुष्टिकरण पर आधारित रही है और अब जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी।
आतंकवाद के मुद्दे पर सपा को घेरा
पूर्व डीजीपी ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी सपा अध्यक्ष को घेरा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद देश और समाज के लिए गंभीर खतरा है और सभी राजनीतिक दलों को मिलकर इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए। बृजलाल का आरोप है कि सपा सरकार के कार्यकाल में वोट बैंक की राजनीति के चलते आतंकवाद से जुड़े कुछ मामलों में आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का प्रयास किया गया।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2013 में अखिलेश यादव सरकार ने आतंकवाद से जुड़े 14 मामलों में दाखिल चार्जशीट वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की थी। इनमें रामपुर सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हमले और अदालत परिसरों में हुए बम धमाकों से जुड़े मामले भी शामिल होने का उन्होंने दावा किया।
लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या ब्लास्ट का किया जिक्र
बृजलाल ने 23 नवंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और अयोध्या की अदालतों में हुए सिलसिलेवार धमाकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। उनके मुताबिक, इन मामलों में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने इन मुकदमों को वापस लेने का प्रयास किया।
उन्होंने कचहरी ब्लास्ट मामलों में गिरफ्तार खालिद मुजाहिद और हकीम तारिक कासमी का भी उल्लेख किया। बृजलाल ने आरोप लगाया कि इन मामलों में कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए थे।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने के प्रयासों में न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण सफलता नहीं मिली। बृजलाल ने यह भी आरोप लगाया कि मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में भी आतंकवाद से जुड़े कुछ मुकदमों को वापस लेने की कोशिश की गई थी।
मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर भी अखिलेश पर निशाना
बृजलाल ने वर्ष 2013 के कवाल कांड और उसके बाद हुए मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कवाल में हुए विवाद के बाद स्थिति बिगड़ती चली गई और मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई।


