रियलिस्टिक सिनेमा और प्रोपेगेंडा की बहस के बीच एक नाम लगातार चर्चा में है—आदित्य धर। उनकी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है और दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
हाल ही में लंदन के एक सिनेमाघर में इस फिल्म का प्रदर्शन हाउसफुल रहा—जो हिंदी फिल्मों के लिए वहां आज भी असामान्य माना जाता है। दिलचस्प बात यह रही कि फिल्म के अंत में जब निर्देशक आदित्य धर का नाम स्क्रीन पर आया, तो दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। आमतौर पर यह सम्मान सिर्फ स्टार कलाकारों को मिलता है, लेकिन यह बदलाव दर्शाता है कि अब दर्शक फिल्मकारों को भी पहचानने लगे हैं।
क्रिकेट से सिनेमा तक का सफर
1983 में दिल्ली में एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे आदित्य धर का पहला सपना क्रिकेटर बनने का था। बतौर स्पिनर वह भारतीय टीम में जगह बनाना चाहते थे, लेकिन अंडर-19 स्तर पर चयन न होने के बाद उन्होंने यह सपना छोड़ दिया।
इसके साथ ही, डिस्लेक्सिया जैसी चुनौती ने उनकी पढ़ाई को कठिन बना दिया। लंबे स्क्रिप्ट पढ़ना भी मुश्किल था, लेकिन कहानी कहने का जुनून उन्हें 2006 में मुंबई ले आया।
संघर्ष और शुरुआती पहचान
आदित्य धर ने अपने करियर की शुरुआत गीतकार के रूप में की। यशराज फिल्म्स की फिल्म काबुल एक्सप्रेस के लिए लिखा उनका गीत ‘काबुल फ़िज़ा’ लोकप्रिय हुआ। इसके अलावा उनकी शॉर्ट फिल्म ‘बूंद’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
हालांकि, कई प्रोजेक्ट्स में काम करने के बावजूद उन्हें क्रेडिट नहीं मिला, जिससे वे निराश हुए। बाद में उन्होंने प्रियदर्शन के साथ सहायक निर्देशक के रूप में काम किया और फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं। फिल्म आक्रोश के डायलॉग लिखने पर उन्हें पहचान मिली।
‘उरी’ से मिली पहचान
2016 में उनकी फिल्म ‘रात बाकी’ अधूरी रह गई, लेकिन उसी साल हुए उरी आतंकी हमला ने उनके करियर को नई दिशा दी।
उन्होंने इस घटना और उसके बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित फिल्म उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक लिखी, जिसकी स्क्रिप्ट उन्होंने महज 12 दिनों में तैयार की।
2019 में रिलीज़ हुई यह फिल्म बड़ी हिट साबित हुई और “How’s the Josh?” जैसा डायलॉग राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो गया। फिल्म ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते।
‘धुरंधर’ और नया फॉर्मूला
‘उरी’ की सफलता के बाद आदित्य धर ने असली घटनाओं से प्रेरित पॉलिटिकल थ्रिलर को अपना सिग्नेचर स्टाइल बना लिया। उनकी फिल्मों आर्टिकल 370 और ‘बारामूला’ में भी यही झलक देखने को मिली।
‘धुरंधर’ में उन्होंने जासूसी, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को मिलाकर एक बड़ा सिनेमाई कैनवास तैयार किया। फिल्म में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में हैं, जिनके करियर के कठिन दौर में यह फिल्म एक बड़ी वापसी साबित हो रही है।
फिल्म को दो भागों में रिलीज़ करना एक बड़ा जोखिम था, लेकिन यह रणनीति सफल रही और दोनों हिस्सों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया।
प्रोपेगेंडा बनाम मनोरंजन की बहस
आदित्य धर की फिल्मों को लेकर यह बहस लगातार जारी है कि क्या वे प्रोपेगेंडा हैं या सिर्फ मनोरंजन।
कुछ समीक्षकों का मानना है कि उनकी फिल्में वर्तमान राजनीतिक दृष्टिकोण के करीब लगती हैं, जबकि अन्य का कहना है कि वे वास्तविक घटनाओं को सिनेमाई अंदाज़ में प्रस्तुत करती हैं—जैसा कि अंतरराष्ट्रीय फिल्मों जैसे जेम्स बॉन्ड या मिशन इम्पॉसिबल में भी होता है।
खुद आदित्य धर इस आलोचना को खारिज करते हुए कहते हैं कि उनकी फिल्मों की नीयत हमेशा सही होती है और दर्शक समझदार हैं कि वे क्या देख रहे हैं।
