भारतीय शेयर बाज़ार इस समय दबाव में है और मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में यह अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाज़ार भारत से आगे निकल गए हैं। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 5.04 ट्रिलियन डॉलर और भारत का लगभग 4.84 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि ताइवान लगभग 5.15 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर है। लगातार दो हफ्तों में दो देशों के आगे निकल जाने से भारत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाज़ारों में इस साल जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 2026 में अब तक 110% से अधिक बढ़ चुका है, जबकि ताइवान का बाजार लगभग 65% ऊपर गया है। इन दोनों देशों की बढ़त का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेज़ी है। TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों ने AI चिप्स और मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग से भारी मुनाफा कमाया है, जिससे इन देशों के बाजार को बड़ा फायदा मिला है।
इसके उलट भारत के शेयर बाज़ार पर इस समय कई दबाव हैं। 2026 में सेंसेक्स लगभग 12% और निफ्टी लगभग 15% तक गिर चुके हैं। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, रुपये की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक तनाव ने भारतीय बाजार को कमजोर किया है। इस साल अब तक विदेशी निवेशक लगभग 24 अरब डॉलर भारत से निकाल चुके हैं, क्योंकि उनका रुझान तेजी से AI आधारित शेयरों की ओर बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी चुनौती AI और हाई-टेक सेक्टर में मजबूत हिस्सेदारी की कमी है। MSCI Emerging Markets इंडेक्स में भारत की हिस्सेदारी भी घटकर लगभग 12% रह गई है। निवेशक फिलहाल उन देशों में पैसा लगा रहे हैं जहां सेमीकंडक्टर, मेमोरी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत है, जबकि भारत इस क्षेत्र में अभी पीछे माना जा रहा है।
अगर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन की समस्याएं जारी रहती हैं तो भारतीय कंपनियों पर लागत और महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। इसका असर एयरलाइंस, ऑटोमोबाइल, केमिकल्स और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों पर अधिक पड़ने की संभावना है। फिलहाल वैश्विक AI रैली और कमजोर घरेलू परिस्थितियों के कारण भारतीय शेयर बाज़ार दबाव में बना हुआ है।


