पश्चिम बंगाल में टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) नेताओं और सांसदों पर कथित हमलों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रयागराज में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि जिस तरह से एक के बाद एक राजनीतिक घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे यह प्रतीत होता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा होता है।
उन्होंने हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर कथित रूप से हमला हुआ है। इसके अलावा एक अन्य सांसद के कार्यालय पर भी हमले की खबर सामने आई है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि ये घटनाएं बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण ढंग से काम करने का अधिकार है, लेकिन यदि लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहें तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य में कानून का राज सर्वोपरि होना चाहिए और किसी भी प्रकार की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल राजनीतिक असुरक्षा ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी भय का माहौल पैदा करती हैं। प्रमोद तिवारी ने राज्य सरकार से अपील की कि वह कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं और स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं सत्तापक्ष की ओर से भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
यह मामला अब केवल एक राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक माहौल पर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।


