मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा को नदियों में सर्वोपरि बताते हुए इसे जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व कहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियाँ केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी स्वरूप पूजनीय हैं, जिनमें गंगा का विशेष महत्व है।
गंगा दशहरा, जिसे गंगावतरण भी कहा जाता है, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व पृथ्वी पर गंगा के अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है और यह जल संरक्षण व पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया है। जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर और कैच द रेन जैसी योजनाओं ने जल सुरक्षा को मजबूत किया है।
अमृत सरोवर योजना के तहत देशभर में 70 हजार से अधिक जलाशयों का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है, जिससे वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिला है। इसके अलावा, चेकडैम, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से जल संकट को कम करने में मदद मिली है।
मध्य प्रदेश में भी ‘गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का व्यापक कार्य किया जा रहा है। यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नदियों, तालाबों, कुओं और अन्य जल संरचनाओं का विकास और स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
राज्य में हजारों चेकडैम, तालाबों के गहरीकरण और नई जल संरचनाओं के निर्माण से भूजल स्तर सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों को जल संरक्षण तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई और वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
यह अभियान जनभागीदारी पर आधारित है, जिसमें ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। यह अभियान मध्य प्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का संदेश देता है।


