ना खरीदना होगा महंगा, आयात शुल्क बढ़ने से ज्वैलरी की कीमतें बढ़ेंगी

shikha verma
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भारत सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क में बड़ा बदलाव करते हुए इसे 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद देश में सोने-चांदी और ज्वैलरी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार का यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और चालू खाता घाटा नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि सोने का आयात देश के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खर्च का कारण बनता है।

आयात शुल्क बढ़ने से ज्वैलरी कारोबार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। ज्वैलर्स के अनुसार, सोने और चांदी की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं होगा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से अपील की थी कि वे एक वर्ष तक सोने की खरीदारी से बचें ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके और देश के आर्थिक हितों को मजबूत किया जा सके।

इस फैसले के बाद ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ऊंचे दामों के कारण सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है और लोग वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 51 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो देश के कुल आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम आर्थिक संतुलन बनाए रखने और रुपये पर दबाव कम करने के लिए लिया गया है। हालांकि इसका असर घरेलू बाजार में सोने की खरीदारी और ज्वैलरी डिमांड पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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