इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 22 महीने से जेल में बंद ताहिर उर्फ बबलू को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। ताहिर को उनकी पत्नी को गुजारा भत्ता न देने के कारण झांसी की परिवार अदालत ने दिसंबर 2025 में जेल भेजा था। पत्नी ने नवंबर 2023 से सितंबर 2025 तक बकाया कुल 2,64,000 रुपये की वसूली के लिए अदालत का रुख किया था।
परिवार अदालत ने हर महीने की चूक को अलग अपराध मानते हुए एक-एक महीने की सजा जोड़कर कुल 22 महीने की कैद दी थी। अदालत ने यह भी कहा कि हर महीने के लिए अलग आवेदन आवश्यक नहीं है, एक ही आवेदन पर पूरी सजा दी जा सकती है।
ताहिर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता धारा 125(3) के तहत ऐसे मामलों में अधिकतम एक महीने की ही सजा दी जा सकती है, और बकाया राशि की वसूली अन्य कानूनी तरीकों से की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह गरीब हैं और इतनी बड़ी राशि भुगतान करने में असमर्थ हैं।
जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि ने 2 अप्रैल 2026 को आदेश दिया कि ताहिर को बिना किसी जमानत या मुचलके के तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि जेल प्रशासन को आदेश तुरंत उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, ताहिर की पत्नी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 मई 2026 को तय की गई है।
इस फैसले को गुजारा भत्ता मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, क्योंकि अदालत ने लंबी कैद को अनुचित करार दिया और कानून के अनुसार उचित समय पर रिहाई सुनिश्चित की।

