केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके अलावा 10,700 करोड़ रुपए से अधिक की कुल लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने के साथ भारतीय रेलवे की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सर्विस रिलायबिलिटी में भी सुधार होगा
मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से रेलवे परिचालन को व्यवस्थित करने और व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ एवं ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए रेल नेटवर्क की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है
स्वीकृत क्षमता विस्तार परियोजनाओं से देश के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को और बेहतर किया जाएगा। इनमें तिरुपति, सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर (तिरुत्तनी), श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर (तिरुचानूर), कोटिलिंगेश्वर देवालय, श्री सीती बैरवेश्वर स्वामी मंदिर, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल जलप्रपात, होसुर किला, मेट्टूर बांध और कोडाइकनाल की पहाड़ियां शामिल हैं
इसके अलावा सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयर मंदिर, नमक्कल किला, कल्याण पसुपतेश्वर मंदिर, यादाद्रिगुट्टा मंदिर, भोंगीर किला, सुरेंद्रपुरी और स्वर्णगिरि मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को भी इन परियोजनाओं से लाभ मिलेगा
ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लौह एवं इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिए बेहद अहम हैं। क्षमता विस्तार के बाद रेलवे के जरिए हर साल करीब 47 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई (47 MTPA) होने की उम्मीद है
रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष परिवहन माध्यम माना जाता है। इन परियोजनाओं से देश के लॉजिस्टिक्स खर्च को कम करने और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही करीब 8 करोड़ लीटर तेल की बचत और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, CO₂ उत्सर्जन में होने वाली यह कमी करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी
स्रोत: readnownews.in


