उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कानपुर में एक बड़े हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। नवंबर में होने वाले इस पांच दिवसीय आयोजन में देशभर के कई हिंदू आध्यात्मिक और सेवा संगठनों के शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों के मुताबिक, करीब 400 से ज्यादा संगठन इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं।
यह आयोजन 26 से 30 नवंबर तक कानपुर के बेनाझाबर स्थित बृजेंद्र स्वरूप पार्क में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के जरिए सेवा, संस्कार, पर्यावरण, आध्यात्मिकता और सामाजिक संगठन जैसे विषयों को लेकर जागरूकता फैलाने की योजना है।
GenZ युवाओं को जोड़ने पर खास जोर
आयोजकों ने इस आयोजन में युवा वर्ग, खासकर GenZ, को जोड़ने पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। इसके जरिए युवाओं को सेवा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ जीवन मूल्यों और आध्यात्मिकता से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस आयोजन में श्री श्री रविशंकर, माता अमृतानंदमयी और स्वामी अवधेशानंद को आमंत्रित किए जाने की जानकारी दी गई है।
हिंदू संगठनों के सेवा कार्यों को मंच देने की तैयारी
आयोजकों का कहना है कि यह मेला विभिन्न सेवाभावी संस्थाओं के लिए एक साझा मंच के तौर पर काम करेगा। इसमें संगठन अपने सामाजिक और सेवा कार्यों को लोगों के सामने रख सकेंगे। आयोजकों के मुताबिक, इन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की भी कोशिश की जाएगी।
कार्यक्रम से जुड़े कानपुर के अध्यक्ष संजीव दीक्षित और सचिव नवेंदु ने बताया कि मेले का उद्देश्य समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देना और लोगों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।
50 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
आयोजकों ने इस अभियान को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि करीब 50 लाख लोगों को अभियान से जोड़ने की योजना है। इसके अलावा सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए कार्यक्रम की पहुंच को करोड़ों लोगों तक ले जाने की कोशिश की जाएगी।
31 अक्टूबर को वंदे मातरम् कार्यक्रम
इस आयोजन से पहले 31 अक्टूबर को कानपुर में करीब एक लाख लोगों द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। आयोजकों की ओर से इसे भी बड़े जनसहभागिता कार्यक्रम के रूप में पेश किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कानपुर में होने वाले इन आयोजनों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि आयोजकों की ओर से कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेवा, संस्कार, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण बताया गया है।


