उत्तर प्रदेश के युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘रंग दे बसंती’ अभियान के तहत बाराबंकी में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। लखपेड़ाबाग स्थित श्री साईं कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के साथ बदलती तकनीक और भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने के बारे में जानकारी दी गई। छात्रों को नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक आधारित शिक्षा की संभावनाओं से भी परिचित कराया गया।
क्विज और टैलेंट क्रिएशन में छात्रों ने दिखाया हुनर
कार्यक्रम में क्विज प्रतियोगिता और टैलेंट क्रिएशन जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं ने इन प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नैतिक, शगुन यादव, प्रखर, उमैरा कुल्सुंग और अदिति सोनी को ‘रंग दे बसंती’ टीम की ओर से ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया।
कॉलेज के प्रिंसिपल सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए उपयोगी मंच उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से छात्रों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ उसे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
नवाचार के लिए छात्रों को मिलेगी 15 हजार रुपये तक की मदद
‘रंग दे बसंती’ के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित विद्यार्थियों को शैक्षिक गतिविधियों के साथ नवाचार और नए प्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए 15 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में आवेदन फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। इच्छुक छात्र-छात्राएं अभियान के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
कवि सम्मेलन से वॉल पेंटिंग तक, युवाओं को मिल रहा रचनात्मक मंच
अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थानों और जिलों में अलग-अलग रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग और मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक विमोचन जैसे आयोजनों के जरिए युवाओं को अपनी प्रतिभा और विचार सामने रखने का अवसर दिया जा रहा है।
‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’ अभियान की थीम
‘रंग दे बसंती’ अभियान की मूल भावना ‘बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग’ पर आधारित है। अभियान के माध्यम से युवाओं को भय और दबाव की संस्कृति से दूर रखते हुए अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा, कौशल, तकनीक और नवाचार से युवाओं को जोड़ने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच यह अभियान युवा प्रतिभाओं को सकारात्मक दिशा देने और उनकी रचनात्मक ऊर्जा को सामने लाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।


