‘PDA की पोल खुद सपा के लोग खोल रहे’, अखिलेश पर ओपी राजभर का तीखा हमला

shikha verma
5 Min Read

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को लेकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सहारनपुर में सामने आए सपा के कथित अंदरूनी विवाद का हवाला देते हुए दावा किया कि पार्टी के भीतर दलित और गैर-यादव पिछड़े समाज के लोगों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ रही है।

‘2027 की सत्ता से पहले सपा बचाने की चिंता करें’

ओपी राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 2027 में सत्ता हासिल करने का सपना देखने से पहले समाजवादी पार्टी को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

राजभर का दावा है कि सपा के ही नेता और कार्यकर्ता पार्टी के PDA सामाजिक समीकरण पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस सामाजिक गठजोड़ को लेकर सपा नेतृत्व लगातार दावा करता है, उसी से जुड़े वर्गों में असंतोष की आवाजें सामने आना पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

PDA फॉर्मूले पर राजभर का तंज

राजभर ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सपा के साथ पंडित और गैर-यादव पिछड़े समाज का पर्याप्त समर्थन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अब दलित और गैर-यादव पिछड़ा समाज के कुछ लोग भी पार्टी के भीतर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं।

अपने पोस्ट में राजभर ने PDA की व्यंग्यात्मक व्याख्या करते हुए सपा पर कटाक्ष किया और कहा कि पार्टी के सामाजिक समीकरण की वास्तविकता अब उसके अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाज से सामने आ रही है।

सहारनपुर सर्किट हाउस की घटना का जिक्र

ओपी राजभर ने अपने बयान में सहारनपुर सर्किट हाउस में हुई कथित घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान सपा के भीतर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नाराजगी देखने को मिली।

राजभर के मुताबिक, सहारनपुर में हुई बैठक के दौरान दलित समाज की जिला पंचायत सदस्य ममता चौधरी ने अपनी नाराजगी सपा नेताओं के सामने जाहिर की। उन्होंने यह भी दावा किया कि दलित और गैर-यादव पिछड़ा समाज से जुड़े कुछ अन्य कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी नेताओं के सामने अपनी समस्याएं और आपत्तियां रखीं।

हालांकि, इन घटनाओं और आरोपों पर सपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

‘अब दबे स्वर में नहीं, खुलकर सवाल उठा रहे’

राजभर ने दावा किया कि सपा के भीतर दलित और गैर-यादव पिछड़ा समाज के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व को सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

राजभर ने अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली पर भी कटाक्ष किया और कहा कि पार्टी नेतृत्व को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने की जरूरत है।

सपा नेताओं के बीच कथित विवाद पर भी निशाना

सहारनपुर की घटना का जिक्र करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि सपा के नेता आपसी विवाद में उलझे हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ही आपस में असंतुष्ट हैं, तो 2027 के चुनाव में बड़े सामाजिक गठजोड़ का दावा कितना प्रभावी होगा।

उन्होंने सपा नेताओं पर पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी निशाना साधा और पार्टी नेतृत्व से अपने नेताओं के व्यवहार पर ध्यान देने की बात कही।

2027 को लेकर बढ़ी सियासी गर्मी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और उससे पहले सपा, भाजपा और अन्य दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। अखिलेश यादव जहां PDA के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल उनके इस सामाजिक समीकरण पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

ओपी राजभर का ताजा हमला भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना होगा कि राजभर के आरोपों पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की ओर से क्या जवाब सामने आता है।

Share This Article
Leave a Comment