मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में 35 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी किए जाने के बाद प्रदेशभर के कोटेदारों में खुशी का माहौल है। कोटेदारों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उनका कहना है कि सरकार ने आर्थिक राहत देने के साथ-साथ राशन वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाकर पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ाई है।
लाभांश बढ़कर 125 रुपये प्रति कुंतल
लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के तहत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि उचित दर विक्रेताओं के लाभांश में 35 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 10 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 25 रुपये की बढ़ोतरी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने लाभांश में अतिरिक्त 25 रुपये की वृद्धि के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
मोहनलालगंज के कोटेदार दिनेश चंद्र द्विवेदी ने सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि लाभांश 90 रुपये से बढ़कर 125 रुपये प्रति कुंतल होने से कोटेदारों को आर्थिक राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ई-पॉस मशीन और डिजिटल रिकॉर्ड के चलते राशन वितरण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी हुई है।
उनके मुताबिक, पहले राशन वितरण को लेकर कोटेदारों पर संदेह किया जाता था, लेकिन डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद रिकॉर्ड और वितरण प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है। इससे कोटेदारों के प्रति लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
सिंगल स्टेज डिलीवरी से आसान हुई आपूर्ति
माल ब्लॉक के कोटेदार राकेश तिवारी ने बताया कि पहले राशन की आपूर्ति को लेकर कई तरह की परेशानियां आती थीं। अब सिंगल स्टेज डिलीवरी व्यवस्था के तहत राशन सीधे उचित दर की दुकानों तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इससे राशन की उपलब्धता बेहतर हुई है और लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने में भी आसानी हो रही है। मौजूदा महंगाई को देखते हुए लाभांश में बढ़ोतरी को उन्होंने कोटेदारों के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया।
GPS से ट्रैक हो रहे राशन से लदे वाहन
गोमती नगर के कोटेदार आरके कन्नौजिया ने बताया कि राशन की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों में जीपीएस की व्यवस्था की गई है। इससे वाहनों की निगरानी और राशन की आपूर्ति को ट्रैक करना आसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि राशन सीधे दुकानों तक पहुंचने और डिजिटल निगरानी के कारण वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे कोटेदार और लाभार्थी दोनों के हित सुरक्षित हुए हैं।
अंगूठा लगाते ही लाभार्थी को मिलता है राशन
काकोरी के कोटेदार आनंद कुमार गुप्ता ने कहा कि पहले राशन वितरण से जुड़ी गड़बड़ियों का आरोप कई बार कोटेदारों पर लगाया जाता था। डिजिटल व्यवस्था आने के बाद वितरण प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और जवाबदेह हुई है।
उन्होंने बताया कि ई-पॉस मशीन के जरिए लाभार्थी की पहचान के बाद अंगूठा लगाते ही राशन वितरण दर्ज हो जाता है। उनके अनुसार, पहले कोटेदारों को 70 रुपये प्रति कुंतल लाभांश मिलता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 90 रुपये किया गया और अब 35 रुपये की वृद्धि के बाद यह 125 रुपये प्रति कुंतल हो गया है।
कोटेदारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से उन्हें आर्थिक राहत मिलने के साथ राशन वितरण व्यवस्था में उनकी भूमिका और सामाजिक सम्मान भी मजबूत हुआ है।


