लेखपाल-पटवारी भर्ती पर हाईकोर्ट सख्त, धामी सरकार और UKSSSC से 4 हफ्ते में मांगा जवाब

shikha verma
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उत्तराखंड में लेखपाल, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती परीक्षा के विवादित सवालों को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।

मामला परीक्षा के कुछ ऐसे प्रश्नों से जुड़ा है, जिनको लेकर अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके दो विकल्प सही हो सकते हैं। इसके बावजूद आयोग की ओर से केवल एक विकल्प को सही माना गया। अभ्यर्थियों ने इसी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन आयोग ने उत्तर कुंजी में बदलाव नहीं किया।

आपत्तियां खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी

यह विवाद वर्ष 2025 में UKSSSC की ओर से आयोजित लेखपाल, पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा से संबंधित है। परीक्षा के बाद आयोग ने उत्तर कुंजी अपनी वेबसाइट पर जारी करते हुए अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी थीं।

कुछ अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र के कई सवालों पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि कुछ प्रश्नों में एक से अधिक विकल्प तथ्यात्मक रूप से सही हो सकते हैं। हालांकि, आयोग ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और अपनी उत्तर कुंजी को बरकरार रखा।

इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में सवाल उठाया गया कि यदि किसी प्रश्न के दो विकल्प सही हो सकते हैं, तो आयोग ने सिर्फ एक विकल्प को सही मानने का आधार क्या बनाया।

जस्टिस पंकज पुरोहित की बेंच में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट के जस्टिस पंकज पुरोहित की सिंगल बेंच में हुई। अदालत के सामने मुद्दा सिर्फ किसी एक अभ्यर्थी के उत्तर से जुड़ा नहीं था, बल्कि प्रश्न तैयार करने और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया गया।

याचिकाकर्ताओं की मांग है कि विवादित प्रश्नों की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए। यदि जांच में दो विकल्प सही पाए जाते हैं, तो उसका लाभ संबंधित अभ्यर्थियों को दिए जाने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से पहले विशेषज्ञों की राय लेना महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर उन प्रश्नों के मामले में जहां एक से अधिक उत्तर सही होने की संभावना हो।

चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और UKSSSC को मामले में चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। फिलहाल अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।

अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। सरकार और आयोग के जवाब के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवादित प्रश्नों और उत्तर कुंजी को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया उचित थी या फिर विशेषज्ञों से दोबारा मूल्यांकन कराने की जरूरत है।

एक अंक भी बदल सकता है अभ्यर्थियों की मेरिट

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में एक-एक अंक बेहद महत्वपूर्ण होता है। किसी प्रश्न के दो उत्तर सही होने के बावजूद यदि केवल एक विकल्प को सही माना जाता है, तो इसका असर सीधे अभ्यर्थियों की मेरिट और अंतिम चयन पर पड़ सकता है।

इसी वजह से यह मामला केवल उत्तर कुंजी में सुधार तक सीमित नहीं रह गया है। अब परीक्षा में पूछे गए सवालों की गुणवत्ता, उत्तरों के मूल्यांकन और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल सभी की नजर सरकार और UKSSSC के जवाब पर है। अदालत में दाखिल होने वाले जवाब से यह तस्वीर साफ होने की उम्मीद है कि विवादित प्रश्नों पर आयोग का फैसला नियमों और विशेषज्ञ राय के अनुरूप था या अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर दोबारा विचार की जरूरत है।

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