लखनऊ विश्वविद्यालय में हॉस्टल मेस की फीस बढ़ाने के फैसले को लेकर छात्रों में नाराजगी बढ़ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेस शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला लिया है, जिसके बाद छात्रों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। छात्रों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर बढ़ी हुई फीस वापस लेने की मांग की है।
मेस फीस में होगी बढ़ोतरी
लखनऊ विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं पर अब खाने का अतिरिक्त खर्च बढ़ने वाला है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, हॉस्टल मेस की फीस में करीब 1300 से 1800 रुपये तक की बढ़ोतरी की जाएगी।
इसके अलावा छात्रों को 3000 रुपये की कॉशन मनी भी अलग से जमा करनी होगी। हालांकि, मेस शुल्क से संबंधित टेंडर अभी फाइनल नहीं हुआ है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुल्क में बदलाव की संभावना भी जताई गई है।
18 हॉस्टल में करीब 3000 छात्र लेते हैं मेस का खाना
विश्वविद्यालय के चीफ प्रोवोस्ट आशीष अवस्थी ने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय में कुल 18 हॉस्टल हैं। इनमें 9 हॉस्टल छात्राओं और 9 हॉस्टल छात्रों के लिए हैं। इन सभी हॉस्टलों में करीब 3000 छात्र-छात्राएं रोजाना मेस में खाना खाते हैं।
वर्तमान में छात्रों से 33,700 रुपये और छात्राओं से 29,192 रुपये लिए जाते हैं। अब प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छात्रों से 35,000 रुपये और छात्राओं से 32,000 रुपये जमा कराए जाएंगे। यह शुल्क 11 महीने के हिसाब से लिया जाता है।
एक किस्त में फीस जमा करने के फैसले का भी विरोध
छात्रों की नाराजगी सिर्फ मेस फीस बढ़ाने को लेकर ही नहीं है, बल्कि पूरी राशि एक साथ जमा कराने के फैसले को लेकर भी है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता छात्र शादी प्रकाश मिश्रा ने बताया कि पहले छात्रों को मेस फीस दो किस्तों में जमा करने की सुविधा मिलती थी। अब विश्वविद्यालय ने पूरी फीस एक ही किस्त में जमा कराने का फैसला किया है।
हालांकि, जिन छात्रों के लिए एक साथ पूरी राशि जमा करना मुश्किल है, वे दो किस्तों में भुगतान के लिए आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, ऐसे छात्रों को दो किस्तों में फीस जमा करने के लिए कुलपति की अनुमति लेनी होगी।
छात्र संगठनों ने फैसले पर जताई नाराजगी
समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और छात्र अभिषेक श्रीवास्तव ‘बाबू’ ने भी मेस फीस बढ़ाने के फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं।
उनके मुताबिक, मेस फीस बढ़ने से हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का सालाना खर्च और बढ़ जाएगा। ऐसे में बढ़ी हुई फीस छात्रों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकती है।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि मेस फीस में की गई बढ़ोतरी और एकमुश्त भुगतान के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए और छात्रों को राहत दी जाए।


