संभल हिंसा पर बृज लाल का बड़ा दावा, ‘साजिश के तहत भड़काई गई थी हिंसा’

shikha verma
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संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश और राज्यसभा सांसद बृज लाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने लेख में उन्होंने दावा किया कि संभल में हुई हिंसा अचानक भड़के आक्रोश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने इस मामले में जांच रिपोर्टों, पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक संरक्षण के मुद्दे पर भी सवाल उठाए हैं।

बृज लाल ने कहा कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका मानना है कि घटना के पीछे पहले से तैयार योजना थी, जिसका उद्देश्य संभल में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना था।

संभल का इतिहास और हरिहर नाथ मंदिर का विवाद

अपने लेख में बृज लाल ने संभल के प्राचीन धार्मिक इतिहास का उल्लेख करते हुए हरिहर नाथ मंदिर से जुड़ी मान्यताओं को सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि संभल लंबे समय से हिंदू आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और यहां भगवान विष्णु के कल्कि अवतार से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

उन्होंने ऐतिहासिक दावे करते हुए कहा कि 1526 में बाबर के दौर में प्राचीन मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया और उसके अवशेषों से वर्तमान ढांचे का निर्माण किया गया। इसी स्थान से जुड़े विवाद के बीच न्यायालय के आदेश पर सर्वे की कार्रवाई शुरू हुई थी।

बृज लाल के मुताबिक, सर्वे के दौरान विरोध बढ़ा और बाद में हिंसा की स्थिति पैदा हुई। इन ऐतिहासिक दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित ऐतिहासिक एवं न्यायिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

24 नवंबर की हिंसा पर पुलिस कार्रवाई का जिक्र

बृज लाल ने दावा किया कि सर्वे के दौरान पुलिस और सर्वे टीम पर पथराव तथा गोलीबारी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

उनके अनुसार, घटना के बाद बड़ी संख्या में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। उन्होंने 123 गिरफ्तारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्रों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

हालांकि, किसी आरोपी की अंतिम जिम्मेदारी और दोषसिद्धि का फैसला अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

जियाउर्रहमान बर्क समेत कई लोगों पर आरोप

अपने लेख में बृज लाल ने समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क पर हिंसा की कथित साजिश में भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने बर्क के खिलाफ बिजली चोरी के मामले में हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया और कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल, जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों और कुछ अन्य स्थानीय लोगों के नाम भी लिए। बृज लाल ने दावा किया कि इन लोगों की भूमिका हिंसा से जुड़े घटनाक्रम में जांच के दायरे में रही है।

इन आरोपों पर संबंधित आरोपियों का पक्ष और अदालत में मामलों की मौजूदा स्थिति को भी रिपोर्टिंग में शामिल किया जाना जरूरी है।

कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भी किया जिक्र

बृज लाल ने संभल हिंसा को कथित अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क से जोड़ने का भी दावा किया है। उन्होंने फरार आरोपी बताए गए तारिक साटा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दुबई से संचालित एक आपराधिक नेटवर्क के जरिए लग्जरी वाहनों की चोरी और अवैध कारोबार किया जाता था।

लेख में दावा किया गया है कि इस अवैध गतिविधि से प्राप्त धन का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी और हिंसा के लिए कथित फंडिंग में किया जाता था। इन गंभीर आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों के आधिकारिक दस्तावेजों और न्यायिक रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है।

जांच आयोग और राजनीतिक विवाद

बृज लाल ने बताया कि 24 नवंबर की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2024 को एक उच्चस्तरीय जांच आयोग का गठन किया था। उनके अनुसार, आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ए.के. जैन शामिल थे।

बृज लाल का दावा है कि जांच में कुछ राजनीतिक नेताओं और स्थानीय लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर इस मामले में “तुष्टिकरण की राजनीति” करने का आरोप भी लगाया और पार्टी नेतृत्व के रुख पर सवाल खड़े किए।

संभल की जनसांख्यिकी को लेकर भी दावा

लेख में संभल की बदलती जनसांख्यिकी का मुद्दा भी उठाया गया है। बृज लाल ने दावा किया कि पिछले कई दशकों में हुए सांप्रदायिक तनाव और हिंसा के कारण हिंदू समुदाय के एक हिस्से को पलायन करना पड़ा।

उन्होंने संभल में 1920 के दशक से अब तक हुए कई दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार हिंसा और कथित राजनीतिक संरक्षण ने क्षेत्र की सामाजिक संरचना को प्रभावित किया।

आबादी से जुड़े प्रतिशत के इन दावों की पुष्टि के लिए आधिकारिक जनगणना और स्थानीय प्रशासन के रिकॉर्ड को आधार बनाया जाना आवश्यक है।

1978 के संभल दंगों का भी उठाया मुद्दा

बृज लाल ने 29 मार्च 1978 को हुए संभल दंगों को भी अपने लेख में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि उस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।

उन्होंने व्यापारी बनवारी लाल गोयल और लाला राम शरण रस्तोगी सहित कई लोगों की हत्या का उल्लेख करते हुए 1978 की हिंसा को संभल के इतिहास का एक गंभीर अध्याय बताया।

1993 में मुकदमों की वापसी पर सवाल

बृज लाल ने आरोप लगाया कि दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद 1978 के दंगों से जुड़े कई मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने इस फैसले को तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि इसका असर संभल के सामाजिक माहौल पर लंबे समय तक पड़ा।

मुकदमों की वापसी से जुड़े दावों की पुष्टि के लिए तत्कालीन सरकारी आदेश, न्यायालय के रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी है।

“कानून से ऊपर कोई नहीं”

बृज लाल ने अपने लेख में कहा कि मौजूदा उत्तर प्रदेश सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त नीति अपनाई गई है। उनका दावा है कि संभल हिंसा के मामले में हुई कार्रवाई से यह संदेश गया है कि राजनीतिक प्रभाव रखने वाला कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर अदालत के निर्णय के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।

बृज लाल ने अपने लेख के अंत में कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति को प्राथमिकता देने की बात दोहराते हुए इसे “वंदे मातरम” और “जय हरिहर नाथ” के उद्घोष के साथ समाप्त किया।

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