सोशल मीडिया पर ‘गडकरी इज नेक्स्ट’ मीम्स की चर्चा, केंद्रीय मंत्री ने दायर किया मानहानि मुकदमा

shikha verma
5 Min Read

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे विवाद के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके खिलाफ कई मीम्स और वीडियो वायरल होने के बाद गडकरी ने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला अभियान बताते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री की ओर से मेटा, एक्स, गूगल और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख तय की है। इस मामले में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर एआई आधारित डीपफेक सामग्री प्रसारित की गई, जिसमें नितिन गडकरी को कथित रूप से एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) से जोड़ा गया।

गडकरी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ पोस्ट और वीडियो उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। उन्होंने अदालत से संबंधित सामग्री हटाने के निर्देश देने के साथ ही 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।

ई-20 नीति को लेकर क्यों शुरू हुआ विवाद?

ई-20 नीति के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना है।

ई-20 ईंधन की शुरुआत अप्रैल 2023 में चुनिंदा पेट्रोल पंपों से हुई थी, जबकि अप्रैल 2025 से इसे देशभर में लागू किया गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस नीति को लेकर बहस तेज हो गई।

कुछ विपक्षी दलों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इस नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, नितिन गडकरी लगातार इसका समर्थन करते हुए इसे देश की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते रहे हैं।

सोशल मीडिया पर कैसे बढ़ा विवाद?

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ‘गडकरी इज नेक्स्ट’ जैसे मीम्स और पोस्ट वायरल हुए। इनमें गडकरी को ई-20 नीति से जोड़कर निशाना बनाया गया। कुछ सोशल मीडिया समूहों ने ई-20 नीति के प्रभावों पर चर्चा शुरू की और उपभोक्ताओं से जुड़े मुद्दे उठाए।

विपक्षी दलों ने भी ई-20 नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने नीति की समीक्षा की मांग की है और वाहन मालिकों की चिंताओं का समाधान करने की बात कही है।

गडकरी ने आरोपों को बताया दुष्प्रचार

नितिन गडकरी ने पहले भी एथेनॉल नीति को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान एक सुनियोजित दुष्प्रचार है।

गडकरी का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण नीति किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि देश में कच्चे तेल के आयात को कम करने, प्रदूषण घटाने और किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

उन्होंने यह भी कहा है कि वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना उनकी लंबे समय से चली आ रही नीति का हिस्सा है और इसका उद्देश्य भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।

परिवार से जुड़े आरोपों पर सफाई

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने एथेनॉल नीति को बढ़ावा देने के पीछे गडकरी के परिवार से जुड़े व्यावसायिक हितों का आरोप लगाया है। गडकरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह केवल राजनीतिक और व्यक्तिगत आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के हित में है। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों का एथेनॉल उत्पादन में योगदान बहुत सीमित है।

ई-20 नीति को लेकर राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया विवाद के बीच अब सभी की नजर बॉम्बे हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है।

Share This Article
Leave a Comment