28 जून 2026 को शुरू हुआ जंतर-मंतर का आंदोलन समय के साथ राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। NEET पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन में छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की प्रमुख बातें।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार से जुड़े सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। शुरुआती चरण में कुछ छात्र प्रतिनिधि भी उनके साथ अनशन में शामिल हुए, जबकि बड़ी संख्या में समर्थक धरना-प्रदर्शन में मौजूद रहे।
वर्तमान स्थिति क्या है?
20 जुलाई 2026 तक शुरुआती चरण के कुछ छात्र प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य कारणों से अपना अनशन समाप्त कर दिया। वहीं, सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके समर्थकों का कहना है कि वे अस्पताल में रहते हुए भी अपना अनशन जारी रखे हुए हैं।
इस बीच आंदोलन से जुड़े अन्य प्रतिनिधियों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रखा और संसद मार्च के दौरान भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए।
आंदोलन में किन-किन की भागीदारी रही?
प्रदर्शन में छात्र संगठनों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला एवं पुरुष प्रदर्शनकारियों के साथ विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। आंदोलन के दौरान कई छात्र नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंच से अपनी बात रखी।
आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
समय के साथ आंदोलन की मांगों में कुछ बदलाव देखने को मिला। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच।
- शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं पर जवाबदेही तय करना।
- परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाना।
- मामले पर संसद में चर्चा और सरकार की ओर से स्पष्ट रुख।
किन राजनीतिक दलों ने प्रतिक्रिया दी?
आंदोलन को लेकर कई विपक्षी दलों के नेताओं ने समर्थन या प्रतिक्रिया व्यक्त की। विभिन्न नेताओं ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया, जबकि कई अन्य ने सोशल Media के माध्यम से आंदोलन पर अपनी राय रखी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने अब तक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जांच प्रक्रिया जारी रहने की बात कही है।
सरकार का क्या रुख रहा?
18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया। बाद में इस मामले पर न्यायिक प्रक्रिया भी सामने आई। सरकार की ओर से कहा गया है कि NEET पेपर लीक मामले की जांच जारी है। हालांकि, आंदोलन की प्रमुख मांगों पर अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
आंदोलन का अब तक क्या असर रहा?
- NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली राष्ट्रीय बहस का विषय बने।
- सोशल मीडिया पर आंदोलन को व्यापक चर्चा मिली।
- विभिन्न विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा।
- संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंचे।
फिलहाल आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस कार्रवाई एवं संवाद की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी पक्ष की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।


