राम मंदिर चढ़ावा मामले पर संजय राउत के सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

shikha verma
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शिवसेना (यूबीटी) के नेता और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर केंद्र सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर में वित्तीय अनियमितता या चोरी की घटनाएं हुई हैं, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

राउत ने राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कथित घटना पर खेद व्यक्त किया था। राउत का कहना है कि केवल खेद जताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि पिछले 12–13 वर्षों में राम मंदिर परियोजना के नाम पर लगभग 14 हजार करोड़ रुपये का चंदा एकत्र किया गया, जिसकी पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की दान पेटियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राउत ने यह भी कहा कि इस पूरे विवाद का असर अयोध्या के स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसाय, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और ई-रिक्शा चालकों पर पड़ा है। उनके अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने से छोटे कारोबार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, श्रद्धालुओं की संख्या में 75 प्रतिशत गिरावट के उनके दावे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

अपने लेख में राउत ने कहा कि इस विवाद से धार्मिक पर्यटन और मंदिर प्रबंधन की छवि पर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित ट्रस्ट से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही का भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले पर स्पष्ट स्थिति सामने आनी चाहिए।

फिलहाल, संबंधित एजेंसियों द्वारा मामले की जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा

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