साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बंद या पुराना मोबाइल नंबर आपकी डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। यह नंबर बाद में किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित किया जा सकता है, जिससे आपके बैंकिंग और ऑनलाइन अकाउंट्स पर जोखिम बढ़ जाता है।
आज के समय में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल या मैसेज का माध्यम नहीं है, बल्कि बैंक खाते, UPI ऐप्स, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स से भी जुड़ा होता है। ऐसे में अगर कोई पुराना नंबर बंद होने के बाद भी अकाउंट्स में अपडेट नहीं किया गया है, तो वह सुरक्षा के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियां आमतौर पर 45 से 90 दिनों के भीतर इनएक्टिव नंबर को नए ग्राहकों को जारी कर देती हैं। ऐसे में पुराने नंबर पर आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य सुरक्षा कोड किसी अजनबी तक पहुंच सकते हैं।
इससे बैंकिंग, सोशल मीडिया और ईमेल अकाउंट्स के हैक होने या अनधिकृत एक्सेस का खतरा बढ़ जाता है। साइबर अपराधी ऐसे मामलों का फायदा उठाकर अकाउंट टेकओवर जैसी धोखाधड़ी को अंजाम दे सकते हैं।
कैसे बचें इस खतरे से?
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि उपयोगकर्ता अपने सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच करें और जहां भी पुराना नंबर जुड़ा हो, उसे तुरंत अपडेट या हटाएं। इसके अलावा केवल SMS आधारित OTP पर निर्भर रहने के बजाय ऑथेंटिकेटर ऐप्स का उपयोग करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
रिकवरी और बैकअप सेटिंग्स में भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पुराना नंबर कहीं सेव न हो, ताकि भविष्य में किसी तरह का जोखिम न रहे।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के साथ यह खतरा लगातार बढ़ रहा है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।


