बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान बनाए गए एक अस्थायी वीवीआईपी शौचालय को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आरटीआई से सामने आए खुलासे के अनुसार, अररिया जिले के रानीगंज में 22 जनवरी 2025 को आयोजित कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से बनाए गए इस टॉयलेट पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
कितना हुआ खर्च?
सूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री और अतिविशिष्ट मेहमानों के लिए बनाए गए अस्थायी टॉयलेट और यूरिनल पर कुल लगभग 7.41 लाख रुपये खर्च किए गए। बताया गया कि यह सुविधा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा कार्यक्रम स्थल पर अस्थायी रूप से तैयार की गई थी और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इसे हटा दिया गया।
तेजस्वी यादव का हमला
इस मामले के सामने आने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि एक घंटे के कार्यक्रम के दौरान कुछ सेकंड के उपयोग के लिए इतना खर्च किया गया, जो पूरी तरह से अनावश्यक है।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि इस राशि से गरीबों के लिए कई स्थायी शौचालय बनाए जा सकते थे। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के तहत शौचालय निर्माण के लिए सीमित राशि दी जाती है, जबकि वीआईपी सुविधाओं पर भारी खर्च किया जा रहा है।
कैसे सामने आया मामला?
इस खर्च का खुलासा तब हुआ जब लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के अभियंता प्रमुख ने 2 जून को महालेखाकार को एक आधिकारिक पत्र भेजा। पत्र में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अररिया जिले में वीआईपी टॉयलेट निर्माण पर हुए खर्च का विवरण दिया गया है।
आरटीआई जानकारी के अनुसार, इस अस्थायी सुविधा का उद्देश्य मुख्यमंत्री और अन्य अतिविशिष्ट अतिथियों की कार्यक्रम स्थल पर सुविधा सुनिश्चित करना था।
सियासी विवाद तेज
मामला सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकारी धन का दुरुपयोग बताया है, जबकि इस पर जेडीयू और बीजेपी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


