उत्तर प्रदेश की आईपीएस अधिकारी अपर्णा रजत कौशिक का एक वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में वे मिर्ज़ापुर जिले से जुड़ी एक गिरफ़्तारी की जानकारी देते हुए प्रेस ब्रीफिंग कर रही थीं। हालांकि, चर्चा का फोकस उनके कामकाज पर होने के बजाय सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनके क़द-काठी और दिखावे पर भद्दे कमेंट किए।
यह वीडियो मिर्ज़ापुर पुलिस के इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया गया था और इसे पाँच दिन में 47 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। वीडियो पर लगभग 65 हज़ार कमेंट्स आए, जिनमें अधिकांश बॉडी शेमिंग और आलोचनात्मक थे। इस स्थिति के बाद पुलिस ने कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया।
इस मामले पर राजनीति और समाजशास्त्र दोनों स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। कांग्रेस के पूर्व एमएलसी दीपक सिंह ने सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी अधिकारी के कामकाज के बजाय उनके शारीरिक रूप पर टिप्पणी करना गलत है। वहीं, पूर्व कुलपति और सोशल एक्टिविस्ट रूप रेखा वर्मा ने इसे समाज में बढ़ते कुसंस्कार का उदाहरण बताया और कहा कि यह दिखाता है कि हमारे समाज में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण कितना गिर चुका है।
कानूनी रूप से देखें तो ऐसे मामलों में बॉडी शेमिंग और अभद्र टिप्पणियाँ किसी व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कार्रवाई मानी जा सकती हैं। इसके तहत आईटी एक्ट और यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून लागू हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ़ अपर्णा रजत कौशिक का मामला नहीं है; आम जीवन और सोशल मीडिया पर भी लोग अक्सर किसी की कद-काठी, रंग या बनावट पर टिप्पणी करते हैं, जो अस्वीकार्य है।
