सऊदी अरब को बड़ा झटका: ड्रोन हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी तेल पाइपलाइन बंद, लाल सागर में हूतियों का कब्जा

Nikhil Malhotra
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विश्व की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको इस पाइपलाइन से अपने तेल का निर्यात करती है। शुक्रवार देर रात सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने इस पाइपलाइन से अस्थायी रूप से तेल…

विश्व की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको इस पाइपलाइन से अपने तेल का निर्यात करती है। शुक्रवार देर रात सऊदी अरब के सरकारी मीडिया ने इस पाइपलाइन से अस्थायी रूप से तेल आपूर्ति बंद किए जाने की जानकारी दी है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इस बंदी को एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम बताया। हालांकि, हूती हमले में पाइपलाइन को नुकसान के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं है

गौरतलब है कि हॉर्मुज में ईरानी नाकेबंदी के बीच हूतियों ने यमन में लाल सागर पर स्थित बाब अल मंदेब पर पकड़ मजबूत कर ली। इसी रास्ते सऊदी अरब से भारत और अमेरिका को तेल का निर्यात होता है

पेरिम द्वीप पर हूती का कब्जा सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इससे अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध में ईरान का पलड़ा थोड़ा भारी हो गया है। जबकि ईरान ने इसके लिए हूती की तारीफ की है

गौरतलब है कि अमेरिका से युद्ध के बीच तेल व गैस आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन बाधित करने के बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह एक अन्य सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग बाब-अल-मंदेब से भी आवागमन बाधित कर सकता है

यमन की आबादी साढ़े तीन करोड़ के आसपास है। यमन का एक बड़ा हिस्सा विद्रोहियों के कब्जे में है। ये विद्रोही सरकार को हटाकर खुद शासन करना चाहते हैं। यमन के कई इलाकों पर हूती विद्रोहियों का भी कब्जा है। यमन के कई बड़े शहर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कब्जे में हैं

1990 के दशक के अंत में हूती आंदोलन शुरू हुआ था। इसने यमन के तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला के खिलाफ मोर्चा खोल कर विद्रोह की शुरुआत की थी। हूतियों का कहना था कि सालेह देश में भ्रष्टाचार कर रहे हैं। इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप करा रहे हैं। सालेह की कथित दमनकारी नीतियों के कारण हूतियों ने बंदूक उठा ली थी। सऊदी अरब की सेना उस समय सालेह के समर्थन में थे। हालांकि, इसके बावजूद भी हूती विद्रोहियों ने सालेह को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया

हूती इस्लाम के जायदी शिया वर्ग से हैं। इन्हें जादियाह भी कहा जाता है। शिया वर्ग को मुसलमान अल्पसंख्यक मानते हैं। वहीं, शिया वर्ग में जादियाह को अल्पसंख्यक कहा जाता है। इनके मत और सिद्धांत दूसरे वर्ग के मुसलमान से काफी अलग होते हैं। शिया मुसलमान ईरान और इराक में प्रभुत्व रखते हैं। जादियाह समुदाय ने अपना नाम ज़ायद बिन अली से लिया है, जो मोहम्मद के चचेरे भाई माने जाते हैं।

जायद बिन अली ने 740 में उमय्यद साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, जो इस्लामी इतिहास का पहला राजवंशीय साम्राज्य था, जिसने दमिश्क पर शासन किया था

ईरान हूति विद्रोहियों को धार्मिक छात्र समूह मानता है। विद्रोह शुरू करते वक्त इस ग्रुप में हुसैन बदरेद्दीन-अल हौती सबसे अहम चेहरा था। वह यमन सरकार के खिलाफ हूती विद्रोहियों का नेतृत्व करता था। साल 2012 में जब हूतियों ने सालेह को यमन की सत्ता से बेदखल किया तो ईरान और भी बेबाकी से उनके समर्थन में आ गया

ईरानी अधिकारियों ने खुलकर हूती विद्रोहियों के समर्थन में बयान देना शुरू कर दिया। ईरान और हूती दोनों सऊदी अरब को अपना दुश्मन मानते हैं। जबकि सऊदी अरब यमन के समर्थन में। यह बड़ी वजह है कि हूतियों को ईरान का साथ मिलता है

स्रोत: readnownews.in

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