भारत में पिछले एक दशक में एलपीजी (लिक्विफ़ाइड पेट्रोलियम गैस) की खपत तेजी से बढ़ी है, जबकि घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। इसके कारण देश की आयात पर निर्भरता काफी बढ़ गई है।
हाल के दिनों में कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखी गई हैं। छात्र, छोटे रेस्टोरेंट और मेस संचालक गैस की कमी से परेशान बताए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर होटल और रेस्टोरेंट बंद होने या मेन्यू सीमित करने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस बीच सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार घरेलू सप्लाई सुरक्षित है और कुछ जगहों पर जमाखोरी और घबराहट में ज्यादा बुकिंग की वजह से दिक्कतें दिख रही हैं।
खपत में तेज बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है।
2015-16 में जहां एलपीजी खपत 19.6 मिलियन मीट्रिक टन थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 31.3 मिलियन मीट्रिक टन हो गई है।
देश में सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या भी 10 साल में लगभग दोगुनी होकर 16.6 करोड़ से बढ़कर करीब 33 करोड़ हो गई है। इसमें सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की बड़ी भूमिका रही है, जिसके तहत 10 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं।
उत्पादन लगभग स्थिर
खपत बढ़ने के बावजूद भारत में एलपीजी का घरेलू उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया। पिछले कई वर्षों से देश में उत्पादन लगभग 12 मिलियन मीट्रिक टन के आसपास ही बना हुआ है।
2015-16 में देश की कुल एलपीजी खपत का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही तैयार होता था, लेकिन 2024-25 तक यह घटकर करीब 41 प्रतिशत रह गया है।
आयात पर बढ़ती निर्भरता
वर्तमान में भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक भी है।
भारत के लगभग 85 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते आते हैं। इस क्षेत्र में तनाव या संघर्ष बढ़ने पर सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पेट्रोलियम गैसों के आयात में सबसे बड़ा हिस्सा क़तर (33%) से आया, इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (27%) और अमेरिका (8.6%) का स्थान रहा।
सीमित भंडारण क्षमता
भारत में एलपीजी भंडारण क्षमता भी सीमित है। अक्टूबर 2025 तक देश में कुल भंडारण क्षमता लगभग 15.5 लाख मीट्रिक टन थी, जो नई सप्लाई बंद होने की स्थिति में केवल करीब 18 दिनों की मांग पूरी कर सकती है।
