फोन में ऐसा कंटेंट रखा तो हो सकती है कार्रवाई, दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को किया गिरफ्तार

shikha verma
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मोबाइल फोन में मौजूद कुछ कंटेंट आपको गंभीर कानूनी परेशानी में डाल सकता है। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में 10 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े अवैध कंटेंट को स्टोर करने और उसे फैलाने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले की जानकारी डिजिटल डिटेक्शन सिस्टम के जरिए सामने आई थी। इसके बाद कई दिनों तक चले अभियान में आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर आरोपियों ने गैर-कानूनी सामग्री को डाउनलोड करने, सुरक्षित रखने और साझा करने के लिए क्लाउड स्टोरेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल किया था।

डिजिटल सिस्टम से कैसे होती है ऐसे कंटेंट की पहचान?

टेक्नोलॉजी कंपनियां अपनी सेवाओं पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) की पहचान के लिए हैश मैचिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं।

हैश मैचिंग में किसी फोटो या वीडियो की एक डिजिटल पहचान (हैश) बनाई जाती है। जब कोई फाइल सिस्टम पर अपलोड होती है तो उसका मिलान संदिग्ध कंटेंट के डेटाबेस से किया जाता है। मैच मिलने पर संबंधित एजेंसियों को अलर्ट किया जा सकता है।

इसके अलावा एआई तकनीक की मदद से नए या बदले गए कंटेंट की पहचान भी की जाती है।

जानकारी पुलिस तक कैसे पहुंचती है?

अगर किसी प्लेटफॉर्म को इस तरह की अवैध सामग्री का पता चलता है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी रिपोर्ट संबंधित संस्थाओं और कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक पहुंचा सकता है। इसके बाद जांच एजेंसियां उपलब्ध जानकारी के आधार पर कार्रवाई करती हैं।

ऐसे कंटेंट से रहें दूर

भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को डाउनलोड करना, स्टोर करना या शेयर करना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

किसी भी संदिग्ध या गैर-कानूनी सामग्री को अपने फोन, सोशल मीडिया अकाउंट या ऑनलाइन स्टोरेज में रखना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।

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