दुनिया के सबसे व्यस्त तेल शिपिंग मार्गों में से एक होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हाल के दिनों में कई जहाज़ों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार हाल ही में दो तेल टैंकरों को इराक़ के तट के पास ‘अज्ञात प्रक्षेपास्त्र’ से निशाना बनाया गया। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के तट के पास एक कंटेनर जहाज़ पर हमले की भी रिपोर्ट मिली है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा उसे निशाना बनाया जा सकता है। इसके बावजूद सीमित स्तर पर जहाज़ों की आवाजाही जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
क्या है होर्मुज़ जलडमरूमध्य?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य मध्य पूर्व का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात स्थित हैं। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर इसकी चौड़ाई लगभग 50 किलोमीटर और सबसे संकरे हिस्से में करीब 33 किलोमीटर है।
अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुमान के अनुसार 2025 में हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस मार्ग से होकर गुजर रहा है, जिसका सालाना मूल्य लगभग 600 अरब डॉलर आंका गया है। इस मार्ग से ईरान के अलावा सऊदी अरब, इराक़, कुवैत, क़तर और यूएई जैसे देशों का तेल भी निर्यात होता है।
अगर यह मार्ग बंद हो जाए तो क्या होगा?
हर महीने लगभग 3,000 जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुजरते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यहां सुरक्षा खतरे बढ़ते हैं तो तेल की कीमतें और परिवहन लागत दोनों तेजी से बढ़ सकती हैं।
ऊर्जा बाजार विश्लेषकों के मुताबिक अगर इस रास्ते से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। पहले ही युद्ध और तनाव के कारण तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं।
एशिया पर भी पड़ेगा असर
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से निकलने वाले लगभग 80 प्रतिशत से अधिक तेल की आपूर्ति एशियाई देशों को जाती है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देश इस मार्ग पर काफी निर्भर हैं। इसलिए अगर यह रास्ता बाधित होता है तो एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
क्या ईरान इस मार्ग को बंद कर सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान तेज गति वाली नौकाओं, पनडुब्बियों और समुद्री बारूदी सुरंगों के जरिए इस मार्ग को बाधित करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की नौसेना पहले भी ऐसे हालात में समुद्री यातायात को बहाल कर चुकी है।
क्या वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं?
संभावित खतरे को देखते हुए खाड़ी देशों ने कुछ वैकल्पिक मार्ग विकसित किए हैं। सऊदी अरब की लगभग 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन रोजाना 50 लाख बैरल तेल ले जाने में सक्षम है। वहीं यूएई ने भी अपने तेल क्षेत्रों को फुजैरा बंदरगाह से जोड़ने वाली पाइपलाइन बनाई है।
हालांकि इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं के बावजूद यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना 80 से 100 लाख बैरल तक की कमी आ सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
