हमीरपुर के मौदहा कोतवाली क्षेत्र के गुडा गांव में शादी का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींचा। दूल्हा मोहित द्विवेदी अपनी बारात के साथ पारंपरिक अंदाज में दुल्हन मोहिनी के घर पहुंचा। खास बात यह रही कि यह बारात 25 सजी-धजी बैलगाड़ियों में सवार होकर तीन किलोमीटर दूर से आई। लगभग 200 बाराती ढोलक और नगाड़ों की थाप के साथ बैलगाड़ियों में सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचे।
यह आयोजन बुंदेलखंड की तीस साल पुरानी परंपरा को जीवित करने का प्रतीक बन गया। बारातियों का स्वागत गांववालों ने पारंपरिक तरीके से किया। उन्हें देशी अंदाज में दोने-पत्तलों में भोजन परोसा गया, जिससे पुराने रीति-रिवाजों का अनुभव और भी जीवंत हो गया।
गांव सहित आसपास के इलाकों में इस बैलगाड़ी बारात की चर्चा हो रही है। लोगों ने इस अनोखी शादी को देखकर पुराने समय की यादें ताजा कीं। यह शादी न केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों का प्रतीक है, बल्कि यह दिखाती है कि आधुनिक समय में भी ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं को संजोकर रखा जा सकता है।
मोहित और मोहिनी की यह शादी सिर्फ दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखने का एक उदाहरण भी बन गई है। पूरे इलाके में इस भव्य और रंगीन बारात की चर्चा अभी भी जोरों पर है।
