लैंगिक रूढ़ियों पर होगा संवेदनशील संवाद
प्रशिक्षण के दौरान मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से बच्चों की बात बिना किसी पूर्वधारणा के सुनने, सभी आवाजों को महत्व देने और बच्चों के अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।
लैंगिक रूढ़ियों की पहचान के साथ कॉमिक्स और कक्षा आधारित गतिविधियों के जरिए बच्चों के बीच इन विषयों पर संवाद स्थापित करने का अभ्यास भी कराया जा रहा है, ताकि कक्षा में सभी बच्चों के लिए समान और सम्मानजनक वातावरण विकसित किया जा सके।
पॉक्सो अधिनियम से बाल सुरक्षा पर जोर
प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के माध्यम से बाल सुरक्षा से जुड़े प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया। मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के जरिए प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
इसके साथ ही बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्र करने, उनका दस्तावेजीकरण करने और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम किया जाएगा।
‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल से किशोर-किशोरियों को जोड़ने का अभ्यास
प्रशिक्षण के दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की जानकारी दी जाएगी। समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागी इन सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के दैनिक जीवन से जोड़ने का अभ्यास करेंगे।
इसके अलावा ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की भी जानकारी दी जाएगी, ताकि विद्यालय, परिवार और बच्चों के बीच बेहतर संवाद स्थापित किया जा सके।
मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा पर भी फोकस
प्रशिक्षण में मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालयों की जिम्मेदारियों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसके तहत सुरक्षित एवं स्वच्छ शौचालय, पानी की उपलब्धता, आवश्यक मासिक धर्म उत्पाद, उनके उचित निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालय स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा।
उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी प्रतिभागियों के साथ चर्चा की जाएगी।


