ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

Nikhil Malhotra
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अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने रात के समय ईरानी पसदारान (रिवोल्यूशनरी गार्ड) के हवाई सुरक्षा ठिकानों और राडार सिस्टम के साथ-साथ समुद्र में विस्फोटक सुरंगें बिछान…

अमेरिकी सेना के अनुसार, उसने रात के समय ईरानी पसदारान (रिवोल्यूशनरी गार्ड) के हवाई सुरक्षा ठिकानों और राडार सिस्टम के साथ-साथ समुद्र में विस्फोटक सुरंगें बिछाने वाले नौसैनिक उपकरणों पर भी हमला किया। इसके जवाब में— “धोबी पर बस न चले, तो गधे के कान ऐंठे” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए—ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए; क्योंकि ये देश अमेरिका के सहयोगी हैं और उनके यहां अमेरिकी सैन्य अड्डे भी हैं।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसे होर्मुज़ जलडमरूमध्य में विस्फोटक सुरंगें बिछाने के विरुद्ध अपनी सेना का “सबसे बड़ा और शक्तिशाली” प्रतिशोध बताया

अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के बंदर अब्बास और चाबहार बंदरगाह सहित उसके भीतरी इलाकों में भी कई जगहों पर बम गिराए और दो ईरानी तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि नए अमेरिकी हमलों का जवाब देने के लिए ईरान द्वारा कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर नए हमलों से तेल की क़ीमतें एक बार फिर बढ़ने लगी हैं

अमेरिका और ईरान द्वारा एक-दूसरे के टैंकरों पर नए हमलों के बाद, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। 7 सितंबर से पहले तक के दस दिनों में, औसतन केवल दस मालवाही जहाज ही उससे होकर गुजर पाए हैं। शनिवार 5 सितंबर को तो इस रास्ते से केवल दो ही जहाज, और रविवार 7 सिंतंबर को 6 जहाज गुजरे। सऊदी अरब के एक टैंकर को वापस जाने के लिए मुड़ना पड़ा। बुधवार 2 सितंबर से होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर एक भी बड़ा टैंकर नहीं गुजरा है

ईरान ने इस बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास अपना एक ख़ास “वर्जित ज़ोन” बनाने की घोषणा की है। वहां की सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख, जनरल मोहसेन रेज़ाई ने सरकारी टेलीविज़न पर कहा कि इस ज़ोन में प्रवेश करने वाले उन जहाजों को निशाना बनाया जाएगा, जिनके बारे में लगेगा कि वे इस जलमार्ग से गुज़रने का प्रयास कर रहे हैं। विस्तृत जानकारी आने वाले दिनों और सप्ताहों में दी जा सकती है।

रेज़ाई के अनुसार, यह विशिष्ट ज़ोन अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी वाली लाइन से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ओर, और वहां से फारस की खाड़ी तक फैला होगा

उन्होंने ईरानी सरकारी टेलीविज़न को बताया, “जो भी जहाज होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने के इरादे से इस इलाके में आएगा—और जिसकी पहचान हो जाएगी—उसे प्रतिबंधों की सूची में डाल दिया जाएगा। ” यह अभी स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी नाकेबंदी की लाइन ईरान कहां मानता है। यह अमेरिकी नाकेबंदी कई सप्ताहों से लागू है। अमेरिका उसके द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाना और ईरानी तेल के निर्यात को रोकना चाहता है।

अमेरिकी सेना के अनुसार, उसके 20 से अधिक युद्धपोत इस नाकेबंदी की देख-रेख कर रहे हैं

ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी नौसेना के खिलाफ फारस की खाड़ी में जहाज-विध्वंसक एक नई “एंटी-शिप मिसाइल” तैनात की है। यह जानकारी भी ईरानी सर्वोच्च सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख, मोहसेन रेज़ाई ने सरकारी टेलीविज़न के साथ वाले इंटरव्यू में ही दी। उनका कहना था कि आवश्यकता पड़ने पर, पहली बार इस्तेमाल होने वाली यह मिसाइल “दुश्मन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि हमारी नौसैनिक घेराबंदी को तोड़ा नहीं जा सकता।”

फिलहाल, न तो अमेरिका पीछे हटने के मूड में है और न ईरान। ईरान को अब तक कितनी क्षति उठानी पड़ी है, इसे कोई नहीं जानता। लेकिन, अमेरिका को यह युद्ध कितना मंहगा पड़ रहा है, उसके संकेत मिलने लगे हैं। कई अमेरिकी सेनेटरों की जानकारी के अनुसार, युद्ध छिड़ने के पहले 6 महीनों में, अस्त्र-शस्त्र जैसी मुख्यत: युद्ध-सामग्रियों पर ही 11 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे। इस पूरे वर्ष, यानी 2026 के लिए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का बजट 838 अरब डॉलर है।

उसे 50 अरब डॉलर और पाने के लिए अमेरिकी संसद से याचना करनी पड़ेगी

अमेरिका के पैट्रियट रॉकेट हों या थॉड राकेट, उनकी प्रति रॉकेट क़ीमत लाखों और करोडों डॉलर है। उदाहरण के लिए, एक टोमाहॉक (Tomahawk) रॉकेट की क़ीमत 30 लाख 60 हज़ार डॉलर है। दूसरी ओर, ईरान द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल की जा रही शाहेद (Shahed) ड्रोनें बनाने की लागत, प्रति ड्रोन केवल 30 हज़ार डॉलर है। ईरान अधिकतर अपनी ड्रोनें ही इस्तेमाल कर रहा है

पिछले 5 वर्षों में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने केवल 322 टोमाहॉक रॉकेट ख़रीदे हैं। अनुमान है कि ईरान के साथ युद्ध के पहले 100 घंटो में ही अमेरिका ने 168 टोमाहॉक रॉकेट दाग दिए। ईरान के बारे में वहां की समाचार एजेसी फ़ार्स का मत है कि युद्ध शुरू होने के बाद से वहां की सेना ने अब तक 500 बैलिस्टिक रॉकेट और क्रूज़ मिसाइलें तथा 2000 ड्रोनें इस्तेमाल की हैं। ईरान को चीन और रूस से क्या और कितने अस्त्र-शस्त्र मिले हैं, इसके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है

स्रोत: readnownews.in

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